पंचकूला |  हरियाणा के पंचकूला जिले में स्थित ‘खोल-हाई-रायतन’ वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत आने वाले आसरेवाली संरक्षित वन में खैर के पेड़ों के अवैध कटान के मामले पीसीसीएफ की रिपोर्ट व  पंंचकूला आरएफओ के पत्र में बड़ा विरोधाभास दिख रहा है। इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ आसरेवाली चेकपोस्ट और सीसीटीवी कैमरों को हटाने के निर्णय को लेकर आया है।  प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, तत्कालीन उच्चाधिकारियों द्वारा सरकार को भेजी गई रिपोर्ट और क्षेत्रीय कार्यालय के आदेशों के बीच अंतर उजागर हुआ हैं।

1. जांच का मुख्य केंद्र: चेकपोस्ट और डिजिटल निगरानी का हटना

आसरेवाली संरक्षित वन में खैर के पेड़ों के बड़े पैमाने पर अवैध कटान के पीछे सबसे बड़ा कारण निगरानी तंत्र का अचानक निष्क्रिय होना बताया जा रहा है। जांच रिपोर्टों के अनुसार, प्रभार (Charge) सौंपने की प्रक्रिया के दौरान यहाँ स्थापित चेकपोस्ट और सीसीटीवी कैमरों को हटा दिया गया था, जिससे क्षेत्र में अवैध गतिविधियों के लिए रास्ता सुगम हो गया।

2. पीसीसीएफ (PCCF) की रिपोर्ट और ‘आग्रह’ का तर्क

तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF HoFF) द्वारा 19 मार्च 2026 को अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS), पर्यावरण एवं वन विभाग को एक रिपोर्ट सौंपी गई।

 रिपोर्ट में उल्लेख है कि 2 सितंबर 2025 तक ग्राम आसरेवाली के पास चेकपोस्ट सक्रिय थी और सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से नियमित निगरानी की जाती थी।

  • वन्य प्राणी विभाग का हस्तक्षेप: रिपोर्ट में कहा गया है कि 25 सितंबर 2025 को प्रभार सौंपने के दौरान वन्य जीव निरीक्षक (Wildlife Inspector) ने वन विभाग के स्टाफ को चेकपोस्ट और सीसीटीवी हटाने को कहा था।

  • समय सीमा: रिपोर्ट के अनुसार, वन्य जीव विभाग के ‘आग्रह’ पर प्रभार सौंपने के लगभग 9 दिन बाद यह सुरक्षा तंत्र हटाया गया।

3. आरएफओ (RFO) का विरोधाभासी पत्र (30 सितंबर 2025)

उपरोक्त रिपोर्ट के विपरीत, वन राजिक अधिकारी (RFO) पंचकूला द्वारा अपने अधीनस्थ वन दरोगा और वन रक्षकों को जारी किया गया पत्र क्रमांक 556 एक अलग ही कहानी बयां करता है। इस पत्र के महत्वपूर्ण तथ्य इस प्रकार हैं:

आरएफओ ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा कि चूंकि क्षेत्र का प्रभार वन्य प्राणी विंग को दे दिया गया है, इसलिए “नाका ड्यूटी समाप्त की जाती है”

  • दस्तावेजी मौन: इस सरकारी आदेश में कहीं भी वन्य प्राणी विभाग के किसी लिखित अनुरोध, पत्र या मौखिक आग्रह का उल्लेख नहीं है।

  • उद्देश्य में अंतर: आरएफओ ने स्टाफ को आदेश दिया कि वे चेकपोस्ट हटाकर अपने-अपने क्षेत्रों की निगरानी करें ताकि अवैध कटाई और खनन न हो।

4. विभागीय खींचतान और जवाबदेही का सवाल

इन दो दस्तावेजों के बीच का अंतर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। जहाँ उच्च स्तरीय रिपोर्ट (PCCF Report) जिम्मेदारी वन्य प्राणी विभाग पर डाल रही है, वहीं क्षेत्रीय आदेश (RFO Order) इसे वन विभाग की एक सामान्य प्रक्रिया के रूप में दर्शा रहा है। वन्य प्राणी विभाग का स्पष्ट कहना है कि उन्होंने चेकपोस्ट हटाने के लिए कभी कोई आधिकारिक निर्देश नहीं दिया था।

5. सरकार की अब तक की बड़ी कार्रवाई

इस मामले की गंभीरता और खैर माफिया की सक्रियता को देखते हुए हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर कठोर कदम उठाए हैं:

  • शीर्ष नेतृत्व पर गाज: सरकार ने पहली बार सख्त रुख अपनाते हुए पीसीसीएफ (PCCF) और चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन को उनके पदों से हटा दिया है।

  • व्यापक निलंबन: प्रशासनिक लापरवाही के आरोप में दो डीएफओ (DFO), एक रेंज अधिकारी, एक निरीक्षक और दो ब्लॉक प्रभारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है।

निष्कर्ष

हाई-लेवल इंक्वायरी (उच्च स्तरीय जांच) के चलते वर्तमान में अधिकारी इस विसंगति पर टिप्पणी करने से बच रहे हैं। हालांकि, दस्तावेजों के बीच का यह विरोधाभास इस ओर संकेत करता है कि निगरानी तंत्र को हटाने की प्रक्रिया में कहीं न कहीं प्रक्रियात्मक चूक हुई है। अब जांच इस बिंदु पर केंद्रित है कि क्या यह केवल एक प्रशासनिक गलतफहमी थी या इसके पीछे कोई ओर कारण था।

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