यमुनानगर (बेलगढ़)। यमुना के किनारे बेलगढ़ से लेकर नवाजपुर-मालीमाजरा क्षेत्र को बाढ़ से बचाने के लिए करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से किए गए कंक्रीट कार्य के ढहने के मामले में अब एक और बड़ा सवाल सामने आया है।

सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिस कंपनी ने यह काम किया था उसका लायबिलिटी पीरियड केवल एक साल का था और वह अब समाप्त हो चुका है।

एक साल की थी कंपनी की जिम्मेदारी

सिंचाई विभाग के एक्सईएन राहिल सैनी ने बताया कि जिस एजेंसी ने यह कार्य किया था उसकी जिम्मेदारी तय समय तक ही थी।

“जिस कंपनी ने यह काम कराया था उसका लायबिलिटी पीरियड एक साल तक का था, जो अब खत्म हो चुका है। अब दोबारा से एस्टीमेट बनाकर जिस स्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है उसे ठीक करवाया जाएगा।”

अब उठ रहे बड़े सवाल

  • 25 करोड़ की परियोजना की गारंटी क्या सिर्फ एक साल की ही थी?

  • अगर इतनी कम अवधि की जिम्मेदारी थी तो इतना बड़ा बजट खर्च करने की क्या जरुरत थी।

  • अब जो नुकसान हुआ है उसे ठीक कराने के लिए क्या विभाग को फिर से सरकारी बजट खर्च करना पड़ेगा?

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर मजबूत और स्थायी संरचना बनाने का दावा किया गया था तो उसका असर लंबे समय तक दिखना चाहिए था। लेकिन काम पूरा होने के कुछ ही समय बाद संरचना के क्षतिग्रस्त होने से परियोजना की गुणवत्ता और निगरानी दोनों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

विभाग की विजिलेंस विंग क्या कर रही है

इस मामले में एक बड़ा सवाल यह है कि विभाग के कामों की लगातार चेकिंग के लिए एक विभागीय विजिलेंस विंग बनाई गई है आखिर विजिलेंस विंग जो लगातार विभाग के कामों में गड़बड़ियों को ढूढ़ती है। पिछले दिनों इस विंग ने विभागीय कार्यों में पत्थरों की रायल्टी चोरी के बड़े मामले की जांच कर उसकी रिपोर्ट सौंपी थी, आखिर विंग द्वारा इस काम की चेकिंग आखिर क्यों नहीं की जा रही है।

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहे है काम

इस बारे में कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष नरपाल सिंह गंदापुरा का कहना है कि बाढ़ से बचाव के कामों में भ्रष्टाचार चरम पर है। अगर एक साल में नुकसान होना चालू हो गया तो इतना खर्च करने की क्या जरुरत थी। दूसरा इस विभाग की यह आदत है कि काम तभी चालू करते है जब मानसून सीजन चालू होने वाला हो। ऐसे में पानी के साथ जो थोड़ा बहुत काम किया होता है वह बह जाता है। उनका कहना है कि जिस तरह से जनता के टैक्स का पैसा बर्बाद किया जा रहा है। अगर इन्हें वाकई सही कामों में लगाया जाए तो जनता का भला हो सके।

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