यमुनानगर (बेलगढ़) | यमुना के रौद्र रूप से बेलगढ़ और आसपास के दर्जनों गांवों को बचाने के लिए बनाई गई पटरी को मजबूत करने के लिए किया गया कंक्रीट वर्क बारिश से पूर्व ही ढहने लगा है। वर्ष 2024-25 में लगभग 25 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से यमुना किनारे पटरी के साथ जो सीसी (कंक्रीट) स्टड और स्टीनिंग का काम किया गया था, वह अब नदी की मामूली लहरों में ही विलीन हो रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि अभी यमुना में पानी का स्तर सामान्य है, फिर भी करोड़ों की लागत से हुआ पक्का काम कई जगह से अपनी जगह छोड़ चुका है।
बेलगढ़ से लेकर नवाजपुर-मालीमाजरा तक के क्षेत्र को बाढ़ मुक्त करने के लिए सरकार ने इस बार रिकॉर्ड 24 से 25 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था। उम्मीद थी कि इस बार ऐसा पटरी को बचाने के लिए ‘परमानेंट स्ट्रक्चर’ तैयार किया गया है जो लंबे समय तक यमुना की मार झेलेगा। लेकिन वर्ष 2025 में जैसे-तैसे काम पूरा होने के चंद महीनों बाद ही हकीकत सबके सामने है। सीसी स्टीनिंग कई जगह से टूटकर पानी में बह चुकी है, जिससे पूरे प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रमुख बिंदु जो खड़े करते हैं सवाल:
अगर बिना उफान के कंक्रीट उखड़ रहा है, तो लाखों क्यूसेक पानी आने पर यह पटरी कैसे टिकेगी?
निर्माण सामग्री पर सवाल : 25 करोड़ के प्रोजेक्ट में इस्तेमाल सीमेंट और पत्थर के मिश्रण (CC Work) की मजबूती पर संदेह।
अधिकारियों की लापरवाही: निर्माण के दौरान और उसके बाद होने वाली टेक्निकल टेस्टिंग (गुणवत्ता जांच) का क्या हुआ?
“जानकारी नहीं है, चेक करवाएंगे”
जब इस गंभीर लापरवाही को लेकर जगाधरी डिविजन के कार्यकारी अभियंता (XEN) राहिल सैनी से बात की गई, तो उन्होंने कहा, “यह मामला अभी मेरी जानकारी में नहीं है। मैं इसकी चेकिंग करवाता हूँ।”




