
बूड़िया (यमुनानगर): आर्य समाज बूड़िया का तीन दिवसीय 40वां वार्षिकोत्सव अत्यंत हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। समारोह के समापन अवसर पर विद्वानों के ओजस्वी प्रवचनों और भजनों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
विद्वानों का पावन उद्बोधन
कार्यक्रम में हरिद्वार से पधारे मुनि सत्यार्थी जी, मेरठ से अजय आर्य जी, सूर्यपाल शास्त्री जी और धर्मेंद्र शास्त्री जी ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की।
-
ईश्वर का स्वरूप: मुनि सत्यार्थी जी ने ईश्वर के पाँच मुख्य कार्यों की व्याख्या करते हुए समाज को कुरीतियों और पाखंडों से दूर रहकर सत्य का मार्ग अपनाने का संदेश दिया।
-
राष्ट्रभक्ति की गूँज: अजय आर्य जी ने अपने सुरीले भजनों के माध्यम से देश पर बलिदान होने वाले वीरों को नमन किया और उपस्थित जनसमूह को राष्ट्रभक्ति व धर्म के प्रति सचेत रहने की प्रेरणा दी।
-
आर्य समाज का गौरव: वक्ताओं ने देश की आजादी में आर्य समाज की ऐतिहासिक भूमिका और वेदों के आधार पर ईश्वर की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
यज्ञोपवीत संस्कार और संकल्प
प्रातः काल भव्य यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें विद्वानों ने यज्ञ की महिमा बताई। इस पवित्र अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण किया और अपने जीवन से बुराइयों को त्यागकर उसे उत्तम बनाने का संकल्प लिया।
सम्मान और कृतज्ञता
कार्यक्रम के अंत में आर्य समाज बूड़िया की कार्यकारिणी द्वारा क्षेत्र की सहयोगी संस्थाओं और विशिष्ट सहयोगियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
-
नारी शक्ति का सम्मान: महिला शक्ति के योगदान को रेखांकित करते हुए समाज की 5 विदुषियों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
गणमान्य विभूतियों की उपस्थिति
इस महोत्सव में चंडीगढ़ से श्री सुशील भाटिया, क्षेत्रीय आर्य सभा के प्रधान श्री कृष्ण पाल जी सहित केंद्रीय आर्य सभा यमुनानगर, मॉडल टाउन, विष्णुनगर, खारवन और करनाल की विभिन्न आर्य समाजों के प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। जालंधर और लुधियाना से आए गणमान्य व्यक्तियों ने भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
समापन
कार्यक्रम का समापन आर्य राकेश ग्रोवर जी के धन्यवाद प्रस्ताव, शांति पाठ और गगनभेदी जयघोष के साथ हुआ। अंत में सभी उपस्थित भक्तों ने श्रद्धापूर्वक ऋषि लंगर ग्रहण किया।




