पंचकूला पंचकूला के बरवाला खंड स्थित आसरेवाली (बेरवाला) संरक्षित वन क्षेत्र में खैर के पेड़ों के अवैध कटान के मामले में डीडब्लयूएलओ ने पुलिस कमिश्नर को पत्र लिख एफआईआर व जांच की मांग की है। पत्र में पुलिस कमिश्नर से अपील की गई है कि पुलिस इस जांच को किसी भी एजेंसी को सौंप सकती है। इसके साथ ही काटे पेड़ों की रिकवरी करवाने व दोषियों को सजा दिलाने को कहा गया है।
प्रोटेक्टड फारेस्ट असरेवाली में बड़ी मात्रा में अवैध कटान का मामला जब वन विभाग के मुखिया के संज्ञान में आया तो उन्होंने इस संबंध में एक जांच टीम का गठन किया। इसके साथ ही वाइल्ड लाइफ के पीसीसीएफ ने भी एक समांतर जांच कमेटी बना दी। दोनों कमेटियों को लगभग एक सप्ताह में जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया। जांच का काम अभी कहां पहुंचा था इसको लेकर कोई रिपोर्ट भेजी गई या नहीं ,इससे पहले ही वन्य प्राणी विभाग ने इस मामले में पंचकूला पुलिस को पत्र भेज एफआईआर दर्ज कर जांच करने को कहा है।
क्या है पूरा मामला?
मंडल स्तरीय वन्य जीव अधिकारी, पंचकूला द्वारा जारी आधिकारिक पत्राचार (क्रमांक 6921, दिनांक 06-03-2026) के अनुसार, यह कटान क्षेत्र के कुछ ज्ञात और अज्ञात व्यक्तियों द्वारा किया गया है। उच्च अधिकारियों को जैसे ही इस अवैध गतिविधियों की भनक लगी, उन्होंने तत्काल मौके का निरीक्षण किया, जिसमें बड़े पैमाने पर खैर के पेड़ों और टहनियों के कटान की पुष्टि हुई।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य:
विभाग की शुरुआती जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं:
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आरोपियों की पहचान: विभाग का अनुमान है कि इस अवैध कटान में गांव आसरेवाली (बेरवाला) के 30-35 लोगों की संलिप्तता हो सकती है, जो ऊंट पालते हैं। शक जताया गया है कि इन ऊंटों का इस्तेमाल भारी मात्रा में कटी हुई लकड़ी को जंगल से बाहर ढोने के लिए किया जा रहा था।
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लिखित ब्यान: मामला सामने आने के बाद गांव के सरपंच और अन्य ने लिखित बयान दिया है कि पेड़ों को काटने का यह अनैतिक कार्य उनके ही गांव के लोगों द्वारा किया गया है।
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काफी लकड़ी बरामद: वन प्राणी निरीक्षक द्वारा मौके से काफी मात्रा में काटी गई लकड़ी बरामद की गई है, जिसे फिलहाल विभाग ने अपने कब्जे में ले लिया है।
पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र में कहा गया है कि कुछ लोग इस मामले को रफा-दफा करने के लिए विभाग को ‘मुआवजा’ (कम्पनसेशन) देने के लिए भी कह रहे हैं। हालांकि विभाग ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ‘वन्य प्राणी सुरक्षा अधिनियम 1972’ के तहत ‘प्रोटेक्टेड एरिया’ (संरक्षित वन) में हुए इस अपराध के लिए कोई भी मुआवजा लेने का प्रावधान नहीं है। विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि दोषियों को प्रोसीक्यूशन (मुकदमेबाजी) का सामना करना ही होगा।अवैध कटान में सामने आए नाम व बरामद हुई लकड़ी की डिटेल पत्र के साथ पुलिस कमिश्नर को भेजी गई है।
पुलिस और प्रशासन से उम्मीदें
विभाग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि वे किसी भी जांच एजेंसी से इस केस की जांच कराने के लिए तैयार हैं। इस लिए इस मामले में पहले एफआईआर दर्ज करने, सरकारी संपत्ति की बरामदगी और दोषियों की गिरफ्तारी व उन्हें उचित दंड देने के लिए कहा गया है। विभाग ने आश्वासन दिया है कि वन्य जीव निरीक्षक, पंचकूला और उनका स्टाफ पुलिस को जांच में हर संभव सहयोग प्रदान करेगा।
इस घटना ने एक बार फिर वन माफिया और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि पुलिस कब तक इन आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करती है।




