वाइल्ड लाइफ विभाग की शिकायत के बाद पुलिस की जांच, कटाई से लेकर खरीद-फरोख्त ओर ट्रांसपोर्ट तक पूरा नेटवर्क काबू
पंचकूला। पंचकूला पुलिस ने वाइल्ड लाइफ विभाग की शिकायत के बाद आसरेवाली सुरक्षित वन क्षेत्र में खैर के बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटाई ओर तस्करी के मामले में एक वन खंड अधिकारी समेत 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही मामले में लाखों की लकड़ी, नगदी व इस कार्य में उपयोग लाए जा रहे वाहन बरामद किए हैं।
मामले की शुरुआत 02 मार्च 2026 को हुई, जब वन खंड अधिकारी रघुविन्द्र सिंह द्वारा थाना चण्डीमंदिर में शिकायत दर्ज करवाई गई कि आसरेवाली सुरक्षित वन क्षेत्र में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई कर चोरी की गई है। वन विभाग द्वारा 25 फरवरी को की गई जांच में लगभग 400 से 500 पेड़ों की अवैध कटाई सामने आई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए 10 मार्च 2026 को मामला दर्ज कर मामलें की जांच शुरु की।
इंस्पेक्टर दलीप सिंह की अगुवाई में टीम ने तकनीकी व गुप्त सूचना के आधार पर 12 मार्च को मुख्य आरोपी इमरान उर्फ मान्ना को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही हबीब खान, शकिल, सराफत, यासिन, समीम को भी उसी दिन गिरफ्तार कर 13 मार्च को आरोपियों को न्यायालय में पेश कर 3 दिन के पुलिस रिमांड लिया गया, जिसके दौरान गिरोह के अन्य सदस्यों नानक और तकी खान सहित अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया।
जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी दिलबहादुर वासी जिला सोलन, हिमाचल प्रदेश चोरी की गई खैर की लकड़ी को खरीदकर आगे बेचता था, जबकि अली मोहम्मद उर्फ रोशन इस अवैध नेटवर्क में ट्रांसपोर्टर की भूमिका निभा रहा था। आरोपियों ने पूछताछ में खुलासा किया कि वे संगठित तरीके से जंगल में खैर के पेड़ों की कटाई कर उन्हें अवैध रूप से बाजार में बेचते थे।
जांच में पता चला कि शिकायतकर्ता वन दरोगा रघुविन्द्र सिंह की भूमिका भी मामले में संदिग्ध है। इसके बाद पुलिस ने 15 मार्च को उसे गिरफ्तार कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की। 16 मार्च को आरोपी इमरान, दिलबहादुर और रघुविन्द्र सिंह को कोर्ट में पेश कर तीन दिन का पुलिस रिमांड लिया गया, जबकि अन्य आरोपियों को रिमांड अवधि पूरी होने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक मनप्रीत सिंह सूदन ने बताया कि इस पूरे मामले की भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2), वन अधिनियम की धारा 32, 33, वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 27, 29 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत जांच की जा रही है।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर लगभग 10 क्विंटल 50 किलोग्राम खैर की लकड़ी, अवैध कमाई की नकदी, पेड़ काटने के औजार तथा दो पिकअप वाहन बरामद किए हैं। अब तक गिरफ्तार 11 आरोपियों में 8 कटाई करने वाले, एक खरीददार, एक ट्रांसपोर्टर और एक वन अधिकारी शामिल है। पुलिस द्वारा मामले से जुड़े अन्य ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।
पंचकूला पुलिस कमिश्नर शिवास कविराज का कहना है कि यह महज पेड़ों की चोरी नहीं, बल्कि एक संगठित पर्यावरणीय अपराध था। हमारे एसआईटी के अथक प्रयासों से हमने न केवल गिरोह के मुख्य सरगना और ट्रांसपोर्टर को पकड़ा है, बल्कि विभाग के भीतर मौजूद अधिकारी को भी बेनकाब किया है जो रक्षक होकर भक्षक की भूमिका निभा रहा था। हमने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की कड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। हमारी टीमें अभी भी उन सभी ठिकानों पर रेड कर रही हैं जहाँ इस लकड़ी को खपाया जाता था। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इस सिंडिकेट की जड़ें जहाँ तक भी फैली हैं, उन्हें पूरी तरह उखाड़ फेंका जाए।




