कुरुक्षेत्र/कैथल: कुरुक्षेत्र और कैथल जिले के बीच 11 हजार एकड़ में फैले ‘स्योंसर फॉरेस्ट’ (प्रोहिबिटेड कंजरवेटिव फॉरेस्ट) में 100 एकड़ में ग्रासलैंड एरिया बनाने के नाम पर झाड़ियों और पेड़ों के कटान को लेकर सवाल उठने शुरु हो गए है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सफाई के नाम पर जंगल के भीतर JCB चलाकर हरे-भरे पेड़ों और पौधों को उखाड़ा जा रहा है, जो कि प्रतिबंधित क्षेत्र के नियमों का सीधा उल्लंघन है।

2016-20 का मामला पहले से हाईकोर्ट में विचाराधीन

ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2016 से 2019-20 के बीच भी इस जंगल में भारी अवैध कटान हुआ था।  उस समय वरिष्ठ IFS अधिकारियों की रिपोर्ट में अवैध कटान की पुष्टि होने के बावजूद जब विभाग की ओर से सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि मामला अदालत में विचाराधीन होने के बावजूद जंगल में दोबारा भारी मशीनरी चलाकर वैसी ही स्थिति दोहराई जा रही है। वैसे भी अप्रैल 2026 से प्रदेश में किसी भी प्रजाति के पेड़ काटने पर हाईकोर्ट की रोक है।

भारी मशीनरी के इस्तेमाल पर उठे सवाल

स्थानीय निवासी लखविंद्र सिंह ने बताया कि पिछले कई दिनों से जंगल में सफाई के नाम पर जेसीबी मशीनें चलाई जा रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया:
“जिस प्रतिबंधित क्षेत्र में भारी संख्या में वन्य जीव निवास करते हैं, वहां बिना अनुमति इतनी भारी मशीनरी को अंदर घुसाने की इजाजत किसने दी? ग्रासलैंड बनाने के बहाने न केवल झाड़ियां, बल्कि कई पौधे और पेड़ भी उखाड़े गए हैं।”

स्योंसर रिजर्व फॉरेस्ट का महत्व

कलेसर और मोरनी के बाद स्योंसर जंगल हरियाणा का तीसरा सबसे बड़ा वनीय क्षेत्र माना जाता है। इसे 1973 में भारतीय वन अधिनियम (IFA) के तहत प्रोहिबिटेड फॉरेस्ट एरिया घोषित किया गया था। नियमानुसार इस क्षेत्र में बिना विशेष अनुमति के किसी भी तरह की व्यावसायिक, विकासात्मक या कटान गतिविधि पर पूरी तरह रोक है। इसे 29 जुलाई 1988 को ‘वन्यजीव अभयारण्य’ घोषित किया गया था और बाद में 11 अक्टूबर 2007 को इसे सरस्वती कंजर्वेशन रिजर्व (Saraswati Conservation Reserve) के रूप में पुनर्गठित किया गया।

विभाग का पक्ष: शिकायत के बाद JCB के काम पर लगाई रोक

मामले पर पंचकूला के DWLO वीरेंद्र गिल ने कहा:
  • पेड़ काटने से इनकार: जंगल में कोई पौधा या पेड़ नहीं उखाड़ा गया है, केवल ‘मस्कट’ आदि झाड़ियों को साफ किया जा रहा है।
  • ग्रासलैंड का उद्देश्य: शाकाहारी और चरने वाले वन्य जीवों को बेहतर प्राकृतिक परिवेश देने के लिए 100 एकड़ में ग्रासलैंड विकसित किया जा रहा है।
  • जांच के आदेश: ग्रामीणों की शिकायत मिलने के तुरंत बाद JCB और मशीनरी के कार्य पर रोक लगा दी गई है।
DWLO ने आश्वासन दिया है कि वे खुद मौके का दौरा कर मामले की निष्पक्ष जांच करेंगे।  स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही आगे का कार्य शुरू किया जाएगा।
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