वर्ष-2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ एसवी एंड एसीबी की सख्त कार्रवाई: 138 सफल ट्रैप, 23 अधिकारियों-कर्मचारियों व 3 प्राइवेट व्यक्तियों को कठोर सजा, 190 भ्रष्ट कर्मचारियों की सूची तैयार
पंचकूला। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भविष्य में उस जिले में दोबारा पोस्टिंग न देने का निर्णय लिया है। इस संबंध में सभी संबधित सरकारी विभागों को पत्र भी लिखा है। यह निर्णय एसीबी की हाई पावर कमेटी में विचार-विमर्श के बाद लिया गया है और इसे जल्द लागू किया जाएगा।
एसीबी प्रमुख अरशिंदर सिंह चावला ने बताया कि रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े गए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भविष्य में उसी जिले में दोबारा पोस्टिंग न देने के संबंध में सभी संबंधित सरकारी विभागों को पत्र लिखा गया है। उन्होंने कहा कि कई बार ऐसा देखने में आया कि किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में कार्रवाई होने के बाद कुछ समय पश्चात उसकी दोबारा उसी जिले में पोस्टिंग हो जाती थी। इससे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के उद्देश्य और आमजन के विश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी विषय को गंभीरता से लेते हुए एसीबी की हाई पावर कमेटी में इस मुद्दे पर चर्चा की गई और सरकार के समक्ष आवश्यक कार्रवाई का प्रस्ताव रखा गया। अब सभी सरकारी विभागों को पत्र भेजकर ऐसे मामलों में उसी जिले में दोबारा पोस्टिंग से बचने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।
वर्ष 2026 में अब तक 138 सफल ट्रैप कार्रवाई
एसीबी प्रमुख ने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक 138 सफल ट्रैप कार्रवाई की जा चुकी हैं, जिनमें सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि आमजन अब भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए आगे आ रहा है और एसीबी की कार्रवाई व्यवस्था पर उसका विश्वास मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी अवकाशों को अलग कर देखा जाए तो औसतन लगभग हर दूसरे दिन एक सरकारी अधिकारी या कर्मचारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंकड़ा केवल कार्रवाई की संख्या नहीं है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि लोग भ्रष्टाचार की शिकायत करने के लिए आगे आ रहे हैं।
21 मामलों में 23 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कठोर सजा
एसीबी प्रमुख ने बताया कि 1 जनवरी 2026 से अब तक 21 मामलों में 23 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विभिन्न न्यायालयों द्वारा कठोर सजा सुनाई गई है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में केवल गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रहती, बल्कि एसीबी द्वारा मामलों को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाते हुए दोषियों को न्यायालय से सजा दिलाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि न्यायालयों द्वारा सुनाई गई सजा से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई केवल तत्काल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि कानूनी प्रक्रिया के अंतिम चरण तक प्रभावी पैरवी और फॉलोअप सुनिश्चित किया जा रहा है।
190 भ्रष्ट अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सूची तैयार
उन्होंने बताया कि एसीबी द्वारा प्रदेश में ऐसे 190 अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सूची तैयार की गई है, जिनके संबंध में लगातार भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतें अथवा इनपुट सामने आए हैं। ऐसे अधिकारियों एवं कर्मचारियों के संबंध में उपलब्ध सूचनाओं का विश्लेषण किया जा रहा है और उन्हें रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि एसीबी का उद्देश्य केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि प्राप्त सूचनाओं और शिकायतों के विश्लेषण के आधार पर भ्रष्टाचार के संभावित स्रोतों की पहचान कर प्रभावी कार्रवाई करना भी है।
भ्रष्टाचार के हॉटस्पॉट की पहचान कर की जा रही लक्षित कार्रवाई
श्री चावला ने बताया कि एसीबी द्वारा विभिन्न विभागों से प्राप्त शिकायतों का लगातार विश्लेषण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि किन विभागों, कार्यालयों और क्षेत्रों से भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतें अधिक प्राप्त हो रही हैं और कौन से क्षेत्र भ्रष्टाचार के हॉटस्पॉट के रूप में सामने आ रहे हैं। हरियाणा में एसीबी के सात पुलिस स्टेशन हैं। इन पुलिस स्टेशनों पर प्राप्त सूचनाओं एवं शिकायतों का विश्लेषण कर उन समस्याओं की पहचान की जाती है, जिनका सामना आम नागरिकों को सरकारी कार्यालयों में करना पड़ता है। इसके आधार पर कार्रवाई के साथ-साथ व्यवस्था में सुधार के लिए भी संबंधित विभागों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
शिकायतकर्ता द्वारा इस्तेमाल राशि की प्रतिपूर्ति के लिए रिवॉल्विंग फंड
एसीबी प्रमुख ने बताया कि ट्रैप कार्रवाई के दौरान शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई या इस्तेमाल की गई राशि को लेकर सरकार द्वारा रिवॉल्विंग फंड की व्यवस्था की गई है। इसके लिए अधिसूचना जारी कर प्रक्रिया को पहले की तुलना में सरल बनाया गया है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत शिकायतकर्ता को न्यायालय के समक्ष एक हलफनामा देना होता है कि मामले का अंतिम निर्णय होने पर संबंधित राशि सरकारी खाते में वापस जमा कराई जाएगी। इस व्यवस्था से भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले व्यक्ति पर आर्थिक बोझ कम करने में मदद मिलेगी और वह बिना किसी अतिरिक्त चिंता के भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत कर सकेगा। चावला ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत करने वाले व्यक्ति की पहचान की सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहता, उसकी पहचान को गोपनीय रखते हुए भी उसे सम्मानित करने तथा कैश रिवार्ड दिया जाता है।
शिकायत प्रक्रिया को और आसान बनाने के लिए मोबाइल ऐप का ट्रायल
एसीबी द्वारा नागरिकों के लिए शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को और सरल एवं सुलभ बनाने के उद्देश्य से एक मोबाइल ऐप विकसित करने का ट्रायल चलाया जा रहा है। कई बार लोगों को एसीबी की हेल्पलाइन का नंबर याद नहीं रहता। प्रस्तावित मोबाइल ऐप में ऐसी सुविधा होगी कि नागरिक एक टच के माध्यम से सीधे हेल्पलाइन से जुड़ सकेंगे। इसके अलावा शिकायतकर्ता की पहचान को सुरक्षित रखने के लिए OTP आधारित सुविधाओं सहित अन्य सुरक्षा फीचर्स भी शामिल किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने जिले से बाहर किसी अन्य जिले में जाता है और वहां उसे भ्रष्टाचार से संबंधित समस्या का सामना करना पड़ता है, तो भी वह सरल तरीके से एसीबी तक अपनी सूचना पहुंचा सके—इसी उद्देश्य से शिकायत प्रणाली को अधिक सुविधाजनक और तकनीक आधारित बनाया जा रहा है।



