HERC की याचिका संख्या 30/2026 पर जताई आपत्ति, निजी कंपनी को लाइसेंस देने की प्रक्रिया रोकने की मांग
यमुनानगर। हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) के समक्ष चल रही समानांतर विद्युत वितरण लाइसेंस (Parallel Distribution License) की प्रक्रिया का विरोध किया है। मोर्चा की ओर से इस मामले में जगाधरी विधायक चौधरी अकरम खान और यमुनानगर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा को ज्ञापन सौंपकर जनहित में तत्काल हस्तक्षेप करने तथा हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र में इस मुद्दे को उठाने की मांग की गई है।
मोर्चा ने ज्ञापन में कहा कि इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड, गुरुग्राम ने गुरुग्राम एवं नूंह राजस्व जिलों में समानांतर विद्युत वितरण लाइसेंस हासिल करने के लिए HERC के समक्ष याचिका संख्या 30/2026 दायर की है। संगठन का आरोप है कि इतने महत्वपूर्ण मामले में लाइसेंस देने से पहले कंपनी की वित्तीय क्षमता, अनुभव और उपभोक्ता हितों से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच जरूरी है।
तीन कंपनियों के साथ गठबंधन का दावा
ज्ञापन के मुताबिक इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड ने HEC Infra Projects Limited, अहमदाबाद, Advait Energy Transitions Limited, अहमदाबाद और Vision India Services (VIS), नोएडा के साथ गठबंधन किया है। कंपनी ने बिजली वितरण लाइसेंस हासिल करने के लिए लगभग 4,717 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश का प्रस्ताव दिया है, जिसमें करीब 1,415 करोड़ रुपये की इक्विटी बताई गई है।
मोर्चा ने कंपनी की वित्तीय क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कंपनी की स्वयं की चुकता पूंजी लगभग एक करोड़ रुपये है, जबकि बाकी पूंजी के लिए अन्य स्रोतों पर निर्भरता दिखाई गई है। संगठन ने HERC के समक्ष लाइसेंस के लिए निर्धारित Capital Adequacy, Creditworthiness और Code of Conduct जैसे मानकों का भी हवाला दिया है।
विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
ज्ञापन में कहा गया कि HERC की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति ने लाइसेंस देने की सिफारिश की है, लेकिन समिति की रिपोर्ट अभी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध नहीं है। मोर्चा ने रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि इतनी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है।
संगठन का कहना है कि नई कंपनी मुख्य रूप से औद्योगिक, मॉल और रेजिडेंशियल सोसायटी जैसे अधिक भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को बिजली वितरण कर सकती है। इससे मौजूदा वितरण व्यवस्था में क्रॉस-सब्सिडी ढांचे पर असर पड़ने की आशंका है।
ग्रामीण और कृषि उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है असर
मोर्चा ने दावा किया कि गुरुग्राम क्षेत्र DHBVN के राजस्व में लगभग 40 प्रतिशत योगदान देता है। यदि अधिक भुगतान करने वाले उपभोक्ता निजी वितरण व्यवस्था में चले जाते हैं तो क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था कमजोर हो सकती है और इसका असर ग्रामीण, कृषि एवं घरेलू उपभोक्ताओं पर टैरिफ बढ़ोतरी के रूप में पड़ सकता है।
ज्ञापन में कहा गया कि मामला केवल गुरुग्राम और नूंह जिलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके प्रभाव पूरे हरियाणा के बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ सकते हैं। इसलिए इसे व्यापक जनहित का विषय बताते हुए विधानसभा में चर्चा की मांग की गई है।
लाइसेंस रद्द करने और सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर देने की मांग
हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने विधायकों से मांग की है कि विधानसभा के मानसून सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाए। साथ ही समानांतर वितरण लाइसेंस की प्रक्रिया को रोकने/रद्द करने, HERC की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा सभी हितधारकों को सुनवाई का अवसर देने की मांग की गई है।
मोर्चा ने कहा कि बिजली व्यवस्था से जुड़े किसी भी फैसले में निजी कंपनियों के हितों से पहले ग्रामीण, किसान, मजदूर और घरेलू उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
30 अगस्त 2026 को सौंपे गए ज्ञापन में हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने दोनों विधायकों से इस मामले को विधानसभा में उठाने और उपभोक्ता हितों की आवाज मजबूती से रखने का आग्रह किया। इस मौके पर मनदीप शर्मा, राजेश कश्यप, पवन हांडा, कर्म सिंह, विक्रम सिंह आदि मौजूद रहे।




