-आठ पेड़ पुराने भी कटे मिले,जिनकी कोई रिपोर्ट नहीं की गई
कालका/पंचकूला: हरियाणा के कालका रेंज के अंतर्गत आने वाले नानकपुर ब्लॉक की कोना बीट के आरक्षित वन क्षेत्र में खैर के अवैध कटान के मामले में वन विभाग द्वारा की गई एक उच्च स्तरीय संयुक्त जांच में खुलासा हुआ है कि तस्करों ने आरक्षित वन क्षेत्र संख्या आर-071, सी-09 (R-71, C-9) से खैर के 26 हरे-भरे पेड़ों को काट डाला। इस मामले में गंभीर लापरवाही बरतने, सूचना तंत्र के निष्क्रिय होने और वास्तविक तथ्यों को छिपाने के आरोप में कालका के वन राजिक अधिकारी (RFO) और संबंधित वन दरोगा पर कार्रवाई के लिए लिखा गया है। जांच में आठ पेड़ पुराने भी कटे मिले, जिनकी कोई रिपोर्ट नहीं की गई थी।
मोरनी-पिंजौर वन मण्डल अधिकारी (DFO) ने इस पूरी जांच रिपोर्ट को प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, हरियाणा (पंचकूला) को भेज दिया है। रिपोर्ट में दोषी अधिकारियों के खिलाफ हरियाणा सिविल सेवा (दण्ड एवं अपील) नियम 2016 के अंतर्गत ‘मेजर पेनल्टी’ प्रोसिडिंग शुरू करने की कड़ी संस्तुति की गई है।
इस तरह खुला मामला: RFO की सूचनाओं में मिला भारी अंतर
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25 जून 2026 (दोपहर 12:00 बजे): वन मण्डल अधिकारी (DFO) को उनके विश्वसनीय सूत्रों से गुप्त सूचना मिली कि कालका रेंज की कोना बीट के ‘खोल मोला’ वन क्षेत्र में अवैध कटान हुआ है।
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RFO का पहला बयान: इस सूचना के आधार पर जब DFO ने कालका के वन राजिक अधिकारी (RFO) से दूरभाष पर इसकी पुष्टि की, तो उन्होंने केवल 4 वृक्षों के अवैध कटान की बात कही।
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RFO का दूसरा बयान: अपराध की पुष्टि के लिए जब DFO ने RFO को स्वयं मौका निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए, तो उसी शाम को RFO ने दूरभाष पर सूचित किया कि कटे हुए पेड़ों की संख्या 26 है।
एक ही दिन में RFO द्वारा दी गई दोनों सूचनाओं में इतना बड़ा अंतर आने के कारण स्थिति पूरी तरह संदिग्ध हो गई। इसके बाद DFO ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अगले ही दिन (26.06.2026 को पत्र क्रमांक 3125-26 के तहत) एक विशेष संयुक्त जांच समिति का गठन कर दिया। इस समिति में देवेन्द्र लाठर (वन राजिक अधिकारी, रायपुर रानी) और विजय नेहरा (उप वन राजिक इन्चार्ज, पिंजौर रेंज) को शामिल किया गया और उन्हें 5 मुख्य बिंदुओं पर जांच के आदेश दिए गए।
जांच समिति का मौका निरीक्षण: 76 लट्ठे बरामद, छिले टुकड़ों ने खोला ‘राज’
संयुक्त जांच समिति ने अपने स्टाफ के साथ संबंधित स्थानीय स्टाफ की मौजूदगी में 27 जून 2026 को मौके का सघन निरीक्षण किया, जहां तस्करों की बड़ी साजिश व स्टाफ की बड़ी लापरवाही के सबूत मिले:
1. अवैध कटान का सटीक स्थान और जीपीएस लोकेशन: यह अवैध कटान आर-71, सी-9, कोना बीट, नानकपुर ब्लॉक, कालका रेंज में हुआ है। जांच टीम ने मौके पर दो मुख्य स्थानों के जी०पी०एस० कोर्डिनेट्स दर्ज किए:
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305211 N, 764850 E (कोना, खोल मोला रोड के पास)
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305241 N, 764927 E (हरी वाला चो, SDD के पास)
2. कटे हुए वृक्षों (Stumps) का पूरा विवरण: जांच के दौरान मौके पर खैर के कुल 26 हरे पेड़ों की मुड्डियां (ठूंठ) पाई गईं, जो पूरी तरह हरी और ताजी थीं।
3. मौके पर मिले 76 लट्ठे (Logs): जांच समिति ने मौके से खैर की लकड़ी के कुल 76 नग लट्ठे बरामद कर अपने कब्जे में लिए।
सबसे बड़ा खुलासा: इन 76 लट्ठों में से 27 लट्ठे पूरी तरह छिले हुए (Debarked) पाए गए, जबकि 49 लट्ठे बिना छिले थे। रिपोर्ट के अनुसार, पेड़ों को पहले काटा गया, फिर उनके टुकड़े किए गए और फिर तसल्ली से उन्हें मौके पर ही छिला गया। यह इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि यह घटना किसी एक दिन की नहीं है, बल्कि कई दिनों तक तस्कर जंगल में सक्रिय रहे और स्थानीय स्टाफ को इसकी भनक तक नहीं लगी (या जानबूझकर अनजान बने रहे)।
कोना बीट की पूर्ण चेकिंग में मिले 5-6 महीने पुराने 8 अन्य कटान
जांच समिति ने जब कोना बीट के दायरे को बढ़ाकर हरी वाला चो (Near SDD) के पास गहन जांच की, तो वहां खैर के 8 अन्य पुराने ठूंठ (Old Stumps) भी पाए गए, जिनका कोई रिकॉर्ड विभाग के पास नहीं था
विभाग से छिपाई गई बात: इन सभी 8 पुरानी मुड्डियों के खिलाफ स्थानीय स्टाफ द्वारा न तो कोई क्षति रिपोर्ट (Damage Report) जारी की गई थी और न ही इसकी कोई सूचना मण्डल कार्यालय को भेजी गई थी।
तस्करी के रास्ते और सुरक्षा के इंतजाम ‘शून्य’
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औजार और साक्ष्य: पेड़ों को काटने के लिए हाथ वाले आरे (Hand Saws) का इस्तेमाल किया गया था। कटे हुए पेड़ों का बालन (जलाऊ लकड़ी) और छिलका मौके पर ही बिखरा हुआ मिला।
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निकासी मार्ग: जंगल से तस्करी के लिए दो मुख्य रास्ते निकलते हैं—एक रास्ता बद्दी (हिमाचल प्रदेश) की तरफ और दूसरा सिसवा (पंजाब) की तरफ जाता है।
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नाका व्यवस्था की पोल खुली: मौका-ए-वारदात पर विभाग का कोई पक्का नाका नहीं था। स्टाफ ने बहाना बनाया कि वे जरूरत के अनुसार रात में अस्थाई नाका लगाते हैं और बीट में एक राखा (चौकीदार) व मुखबिर तैनात हैं, लेकिन यह तंत्र पूरी तरह फेल साबित हुआ।
अधिकारियों व कर्मचारियों पर कोताही व लापरवाही के आरोप
1. वन राजिक अधिकारी (RFO) कालका रेंज:
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वन राजिक अधिकारी अधीनस्थ कर्मचारियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में पूरी तरह विफल रहे।
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संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित निगरानी नहीं की और न ही कोई प्रभावी मुखबिर तंत्र विकसित किया।
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बार-बार हो रहे अवैध कटान का पता लगाने में असफल रहे और उच्चाधिकारियों को समय पर सूचना देने के बजाय वास्तविक तथ्यों को छिपाया या विलम्ब से प्रस्तुत किया।
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पुरानी हिस्ट्री: इससे पहले भी अवैध समतलीकरण के एक मामले में उन्हें 10.06.2026 को कारण बताओ नोटिस (पत्र क्रमांक 2487-88) जारी किया गया था। उसका उत्तर भी असंतोषजनक और केवल खानापूर्ति वाला पाया गया, जो दर्शाता है कि उनका स्टाफ पर कोई नियंत्रण नहीं है।
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वन दरोगा ने
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नियमित रूप से बीट का निरीक्षण नहीं किया और न ही प्रभावी ढंग से गश्त कराई।
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बीट स्टाफ की कोई निगरानी नहीं की गई और अवैध कटान की समय पर सूचना उच्चाधिकारियों को नहीं दी।
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वन अपराध की रोकथाम के लिए धरातल पर कोई प्रभावी प्रयास नहीं किए गए।
डीएफओ की अंतिम संस्तुति (Recommendations)
डीएफओ विशाल कौशिक ने अपनी जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष में स्पष्ट किया गया है कि यह अवैध कटान केवल छोटे कर्मचारियों की गलती नहीं है, बल्कि रेंज स्तर पर घोर लापरवाही, कमजोर निगरानी और निष्क्रिय सूचना तंत्र का परिणाम है। अतः डीएफओ मोरनी-पिंजौर ने निम्नलिखित कार्रवाई की संस्तुति की है:
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वन राजिक अधिकारी (RFO), कालका के विरुद्ध हरियाणा सिविल सेवा (दण्ड एवं अपील) नियम 2016 के अन्तर्गत Major Penalty proceedings (बड़ी शास्ति/विभागीय जांच) तत्काल प्रारम्भ की जाए।
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इन्चार्ज वन दरोगा के विरुद्ध भी Major Penalty proceedings शुरू की जाए।
इस रिपोर्ट की एक प्रति आगामी आवश्यक और सख्त कार्रवाई हेतु वन संरक्षक, उत्तरी परिमण्डल, अम्बाला को भी प्रेषित कर दी गई है।


