यमुनानगर: हरियाणा के कलेसर वन्यजीव अभयारण्य (WLS) और नेशनल पार्क में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई और वन्यजीव आवास के क्षरण को लेकर जो रिपोर्ट सामने आई है। उसमें 13209 एकड़ जंगल में अवैध कटान की जांच की गई, जिसमें खैर के 3253 पेड़ों कटान का पता चला है। जांच के लिए 9 अलग-अलग हिस्सों को बांटकर निरीक्षण किया गया। 19 मार्च 2026 को गठित जांच कमेटी की अध्यक्षता आईएफएस सुभाष यादव ने की।
3,200 से अधिक पेड़ काटे गए
समिति द्वारा सौंपे गए आंकड़ों के अनुसार, पूरे क्षेत्र में खैर के पेड़ों के कुल 3,253 ठूंठ (Stumps) पाए गए हैं। पुराने ठूंठ या मुंडिया 1780 जबकि नई मुंडिया 1473 पाई गई, यानी कटान बहुत लंबे समय से चल रहा था।
तालिका का विवरण: विभिन्न टीमों द्वारा जमा की गई ठूंठों (Stumps) की रिपोर्ट
जांच रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग टीमों ने खैर के पेड़ों के जो अवशेष (ठूंठ) पाए, उनका विवरण इस प्रकार है:
| टीम | टीम लीडर | नए ठूंठ (New Stumps) | पुराने ठूंठ (Old Stumps) | कुल ठूंठ |
| A | रविंदर धनखड़, IFS | 45 | 53 | 98 |
| B | पुष्कर राज, IFS | 107 | 140 | 247 |
| C | .संदीप गोयत, IFS | 87 | 363 | 450 |
| D | दीपेंदर गुलिया, IFS | 276 | 279 | 555 |
| E | राजेश माथुर, HFS | 758 | 396 | 1,154 |
| F | ऋषि राज, HFS | 129 | 255 | 384 |
| G | सुरेंद्र डांगी, HFS | 40 | 122 | 162 |
| H | बी. एस. राघव, HFS | 18 | 42 | 60 |
| I | अभिषेक सांगवान, IFS | 13 | 130 | 143 |
| कुल | 1,473 | 1,780 | 3,253 |
फील्ड विजिट के मुख्य अवलोकन और तथ्य
अध्यक्ष द्वारा की गई औचक जांच और टीम लीडरों की रिपोर्ट के आधार पर निम्नलिखित तथ्य सामने आए हैं:
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पुराने ठूंठ: रिपोर्ट में दर्ज पुराने ठूंठों की उम्र या कटाई की अवधि को ध्यान में नहीं रखा गया है । इसमें 10 साल से भी अधिक पुराने और गले हुए ठूंठ भी शामिल किए गए हैं ।
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नए ठूंठ: रिपोर्ट किए गए नए ठूंठ भी 2 साल तक पुराने हो सकते हैं । जांच में कुछ ठूंठों पर कुल्हाड़ी मारकर देखा गया, तो उनमें ‘सैपवुड’ (गीली लकड़ी) नहीं पाई गई ।
कटाई का समय: यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि जो नए ठूंठ मिले हैं, वे क्षेत्र को वन्यजीव विंग (Wildlife Wing) को सौंपे जाने के बाद के ही हैं ।
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सबूत मिटाने की कोशिश: फील्ड चेकिंग के दौरान, कांसली और चिकन बीट में पेड़ों के ठूंठों को जमीन खोदकर निकालने के मामले भी पाए गए । हालांकि, उनकी जड़ों की जांच करने पर वे पुरानी और सूखी पाई गईं
पुरानी समस्या: कलेसर अभयारण्य और आसपास के क्षेत्रों में खैर की अवैध कटाई एक बहुत पुरानी समस्या है और समय-समय पर ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं । वन विभाग ने लकड़ी तस्करों के खिलाफ नियमित कार्रवाई भी की है
आरओ कलेसर, छछरौली और निरीक्षक (वन्यजीव), कलेसर द्वारा प्रस्तुत कार्रवाई रिपोर्ट :
A. आरओ, कलेसर :वन्यजीव अभयारण्य कलेसर (कलेसर रेंज) में 2016-17 से 2025-26 (06-09-2025 तक) तक अवैध कटान का विवरण
तालिका (सारांश):
कुल जारी एफओआर (F.O.R): 170
खैर के पेड़ों की संख्या: 571
बरामद लट्ठे: 623
जब्त वाहन: 47
कंपाउंड किए गए मामले: 15
कुल एफआईआर (F.I.R): 51
कुल अभियोजन मामले (P.C Cases): 104
B. आरओ, छछरौली
2016-17 से 06.09.2025 तक अवैध खैर के पेड़ों के कटान का विवरण:
कुल जारी एफओआर (FOR): 257
बरामद लट्ठे: 2743
काटे गए पेड़: 985
जब्त वाहन: 57
कंपाउंड किए गए मामले: 25
दर्ज एफआईआर (FIR): 93
अभियोजन मामले (PC Cases): 117
C. निरीक्षक (वन्यजीव), कलेसर
07.09.2025 से 10.04.2026 तक की अवधि (वन्यजीव विंग को क्षेत्र सौंपने की अवधि):
खैर के पेड़: 276 ,गैर-खैर के पेड़: 03 ,कुल पेड़: 279 ,कार्रवाई: 10 अभियोजन मामले, 13 एफआईआर, कुल 60 डी.आर (DRs) ,जब्त वाहन: 09 (कैंटर, मोटरसाइकिल, ट्रक, पिकअप, स्कार्पियो आदि)
सभी रेंजों का महायोग (टेरिटोरियल और वन्यजीव):
तालिका: कुल एफओआर (FOR): 487 ,काटे गए कुल पेड़: 1835 ,बरामद कुल लट्ठे: 3366 ,कुल जब्त वाहन: 113
कुल कंपाउंड मामले: 40 ,कुल एफआईआर: 169 ,कुल अभियोजन मामले: 231
आस-पास के लोगों ने बताए अवैध कटान में शामिल लोगों के नाम:
निरीक्षण के दौरान, कुछ स्थानीय लोगों को पता चला कि जाँच चल रही है, जांच अधिकारियों से चुपके से मिले और अपना नाम न उजागर करने को कहा और उन्होंने पेड़ काटने में शामिल व्यक्तियों के नाम और फोटो दिए। इसके आधार पर रिपोर्ट में कहा गया कि कटान में शामिल लोगों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम 1927 और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर और एफओआर दर्ज करने की आवश्यकता है। सूचना देने वाले लोगों ने यह भी बताया गया कि क्षेत्र के सुरक्षा पहरेदार (protection watchers) और कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत हो सकती है क्योंकि वे पिछले 20 से अधिक वर्षों से एक ही पद पर तैनात हैं। पहरेदारों को हटाने की आवश्यकता है और उन कर्मचारियों का तबादला करने की आवश्यकता है जिनका इन संवेदनशील क्षेत्रों में लंबा कार्यकाल रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया कि केवल कलेसर वन्यजीव अभयारण्य और नेशनल पार्क ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी गश्त और निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता है जो खैर और अन्य पेड़ों के अवैध कटान के प्रति संवेदनशील हैं। चेक पोस्टों को मजबूत करने की जरूरत है। संरक्षित क्षेत्रों और पीएलपीए (PLPA) तथा आसपास के वन क्षेत्रों में अवैध पेड़ कटान में शामिल अपराधियों के खिलाफ प्रादेशिक और वन्यजीव कर्मचारियों द्वारा समन्वित कार्रवाई की भी आवश्यकता है। कर्मचारियों को गश्ती वाहन, वॉकी टॉकी प्रदान करने की आवश्यकता है क्योंकि वन्यजीव अभयारण्य और नेशनल पार्क के मुख्य क्षेत्रों में कोई मोबाइल नेटवर्क नहीं है।
संरक्षित क्षेत्रों में बीट, ब्लॉक और रेंज को व्यवस्थित करने की आवश्यकता है और वन्यजीव रक्षक (WL Guards), उप-निरीक्षक (WL) और निरीक्षक (WL) के कैडर को प्रादेशिक विंग के समकक्ष रैंक और वेतनमान वाले पदों यानी वन रक्षक, वनपाल, डिप्टी रेंजर के साथ विलय करने की आवश्यकता है ताकि संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार उचित तैनाती और बेहतर प्रशासन हो सके। रेंज अधिकारियों, वनपालों और वन रक्षकों को वन या वन्यजीव क्षेत्रों की परवाह किए बिना तैनात करने की आवश्यकता है जैसा कि देश के लगभग सभी राज्यों में किया गया है।




