यमुनानगर। जिले में अवैध खनन और खनिज के अवैध परिवहन पर लगाम लगाने के लिए रणजीतपुर, बिलासपुर, साढौरा और छछरौली जैसे संवेदनशील इलाकों में रोड साइड लगाए सरकारी जांच नाके अब सवालों के घेरे में हैं। सरकारी नाकों पर प्राइवेट लोग गाड़ियों के कागज चेक कर रहे है। ऐसे में सीधा सवाल यह है कि आखिर इसका क्या मतलब निकाला जाए, क्या सरकारी विभाग के कर्मचारियों को ई-रवाना, बिल आदि जांच करने की जानकारी नहीं है।
जांच सरकारी, चेहरा ‘प्राइवेट’
यह पूरा नजारा रणजीतपुर से लेकर ताजेवाला व सढौरा तक देखा जा सकता है। प्राइवेट लोगों की नाकों पर मौजूदगी पूरी तरह से शक के दायर में आ गई है। नियमों के मुताबिक, खनन सामग्री से भरे वाहनों की जांच केवल अधिकृत सरकारी कर्मचारियों को ही करनी चाहिए।सरकारी कर्मचारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्राइवेट युवक वाहनों को रोकते और उनके कागजात खंगालते नजर आ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि इन निजी व्यक्तियों को सरकारी कार्य में हस्तक्षेप करने की अनुमति किसने दी?
बिना नंबर प्लेट के दौड़ रहे ‘यमराज’
नाके पर सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कई भारी वाहन बिना नंबर प्लेट के भी गुजर रहे हैं। कानूनन बिना पहचान के वाहन चलाना अपराध है, बिना नंबर प्लेट के वाहनों की कागजी जांच करना केवल हास्यास्पद है।
“जब वाहन की पहचान ही स्पष्ट नहीं है, तो कर्मचारी किस आधार पर उसकी वैधता की पुष्टि कर रहे हैं? यह सीधे तौर पर सुरक्षा और राजस्व के साथ खिलवाड़ है।”
नाकों पर मौजूद जब सरकारी कर्मचारियों से इन प्राइवेट लोगों की भूमिका के बारे में पूछा जाता है , तो उनके पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं होता। कर्मचारियों की यह चुप्पी इस संदेह को पुख्ता करती है कि नाकों पर जांच के नाम पर क्या चल रहा है। बताया जाता है कि यह प्राइवेट लोग रायल्टी कपंनी के कर्मचारी है जबकि नियमानुसार रायल्टी कंपनी के कर्मचारी केवल खनिज ब्लाक यानी जहां पर खान होती है वहां पर ही चेकिंग कर सकते हैं। हरियाणा में खनिज पर रायल्टी का सिस्टम केवल कच्चे माल पर है न कि तैयार माल पर रायल्टी वसूलने का। ऐसे में सवाल खड़ा होना लाजिमी हैं।
अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद उच्च अधिकार इस क्या कार्रवाई करते हैं और क्या इन ‘प्राइवेट गुर्गों’ को सरकारी नाकों से बाहर किया जाएगा?



