पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर। हरियाणा के उत्तर हरियाणा वन क्षेत्र (नॉर्थ सर्कल) में हुए कथित खैर कटान मामले ने अब प्रशासनिक और तकनीकी उलझनों का रूप ले लिया है। एक ओर पुलिस की तफ्तीश जारी है, वहीं दूसरी ओर वन मुख्यालय द्वारा गठित जांच समितियों की कार्यप्रणाली और उनकी समय-सीमा पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। अब नार्थ सर्कल के तीन डिविजनों के फारेस्ट एरिया की जाचं के लिए एक नई कमेटी बनाई गई है।
जांच का नया स्वरूप: औपचारिकता या निष्पक्ष पड़ताल?
7 अप्रैल 2026 को वन मुख्यालय ने पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर डिविजन के लिए एक नई जांच समिति का गठन किया है। इस समिति की कमान M&E (Monitoring & Evaluation) विंग के अधिकारियों को सौंपी गई है।
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डीएफओ,हिसार M&E: यमुनानगर डिविजन की जांच।
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डीएफओ, करनाल M&E: मोरनी-पिंजौर डिविजन की जांच।
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CF M&E (करनाल): अंबाला डिविजन की जिम्मेदारी।
हैरानी की बात यह है कि इस समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए मात्र दो सप्ताह (14 दिन) का समय दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अकेले मोरनी-पिंजौर क्षेत्र में ही हजारों हेक्टेयर का वनीय क्षेत्र है। इतने बड़े भौगोलिक क्षेत्र में कटे हुए पेड़ों की गिनती और अवैध कटान का आकलन इतने कम समय में करना व्यावहारिक रूप से असंभव प्रतीत होता है। यह कार्य कई माह चलने के बाद ही पूरा हो सकता है, जिसमें भी इससे अधिक स्टाफ की जरुरत पड़ेगी। इसकेअलावा यमुनानगर में बड़ा वनीय क्षेत्र है। यमुनानगर के अलावा अंबाला में भी जांच होनी है।
‘पैरा नंबर 13’ को हटाना
मामले में मोड़ तब आया जब 1 अप्रैल 2026 को नए चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन ने कार्यभार संभालते ही पुराने आदेशों में बदलाव किए।
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दायरा सीमित: जांच को केवल ‘कलेसर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी’ तक ही सीमित कर दिया गया।
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महत्वपूर्ण विलोपन: पुराने आदेशों के ‘पैरा नंबर 13’ को हटा दिया गया, जिसमें सेक्शन 4 और 5 के तहत आने वाले यमुनानगर और मोरनी के टेरिटोरियल वन क्षेत्रों की सघन जांच की मांग की गई थी।
क्रॉस-चेकिंग पर सवाल: विंग्स के बीच का असंतुलन
वन विभाग के गलियारों में यह तर्क दिया जा रहा है कि यदि ‘वाइल्ड लाइफ’ एरिया की जांच ‘टेरिटोरियल’ विंग के अधिकारी कर रहे हैं, तो ‘टेरिटोरियल’ क्षेत्र की जांच में ‘वाइल्ड लाइफ’ विंग के अनुभवी अधिकारियों को शामिल क्यों नहीं किया गया?
“निष्पक्ष क्रॉस-चेकिंग तभी संभव है जब दोनों विंग्स के अधिकारियों का एक साझा पैनल बनाया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की आंतरिक मिलीभगत की गुंजाइश न रहे।”
अब तक की कार्रवाई का घटनाक्रम
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पुलिस की सक्रियता: 10 मार्च 2026 को मामला दर्ज होने के बाद पुलिस अब तक एक ब्लॉक अधिकारी सहित 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
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निलंबन की गाज: विभाग ने DWLO राजेंद्र डांगी, DFO विशाल कौशिक और वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर सुरजीत यादव, पंचकूला रेंज अधिकारी मुनीर गुप्ता को निलंबित कर दिया है।
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नेतृत्व परिवर्तन: इसी बीच सरकार ने तत्कालीन PCCF और चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन को उनके पदों से हटाकर नए अधिकारियों को कमान सौंपी है।




