मोरनी/पंचकूला: हरियाणा सरकार द्वारा स्टाम्प ड्यूटी में की गई अत्यधिक वृद्धि के खिलाफ मोरनी खंड के सरपंचों ने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया है। ‘सरपंच संगठन महापंचायत, खंड मोरनी’ के बैनर तले सरपंचों ने उपायुक्त (DC) पंचकूला को एक मांग-पत्र सौंपकर इस बढ़ोतरी को वापस लेने और जनता को राहत देने की मांग की है।

पिछड़ेपन और भौगोलिक परिस्थितियों का दिया हवाला

उपायुक्त को भेजे पत्र में सरपंच संगठन ने स्पष्ट किया कि मोरनी पहाड़ी क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से शेष हरियाणा से बिल्कुल भिन्न है। यह एक दुर्गम और पिछड़ा क्षेत्र है, जहाँ के निवासियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति मैदानी इलाकों जैसी नहीं है। सरपंचों का तर्क है कि सरकार द्वारा स्टाम्प ड्यूटी में की गई यह वृद्धि पूरी तरह से ‘गैर-तार्किक’ है और यहाँ की आम जनता पर एक नाजायज आर्थिक बोझ है।

26 ग्राम पंचायतों ने किया बहिष्कार

सरपंच संगठन महापंचायत के प्रधान और अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि मोरनी खंड की सभी 26 ग्राम पंचायतों की ओर से इस वृद्धि पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई जाती है। पत्र में लिखा गया है:

“मोरनी खंड एक पर्यटन क्षेत्र होने के बावजूद विकास के पैमानों पर पिछड़ा है। यहाँ की जनता पर स्टाम्प ड्यूटी का अतिरिक्त भार डालना अनुचित है। खंड की समस्त पंचायतें सरकार की इस बढ़ोतरी का पुरजोर बहिष्कार करती हैं।”

तार्किक आधार पर राहत की मांग

संगठन ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि मोरनी की विशिष्ट परिस्थितियों को देखते हुए यहाँ स्टाम्प ड्यूटी की दरों का पुनर्मूल्यांकन किया जाए। सरपंच संगठन महापंचायत मोरनी के अध्यक्ष पंचपाल शर्मा ने बताया कि इस एरिया में इतना रोजगार नहीं है न ही कोई आय का अच्छा साधन। यहां तक की गांवों में जाने के लिए सही रास्ते तक नहीं है ऐसे में इस तरह स्टाम्प डयूटी बढ़ाना गलत है। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह बढ़ी स्टाम्प डयूटी को वापस ले।

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