नारायणगढ़, अंबाला। एजेएल प्लॉट आवंटन मामले में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता स्वर्गीय मोती लाल वोहरा को कोर्ट से क्लीन चिट मिलना इंसाफ की जीत है और यह दिखाता है कि किस तरह से राजनीति लाभ के लिए भाजपा द्वारा यह सारा मामला रचा गया।
यह बात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक मेहता ने कही। उन्होंने बताया कि इस मामले में पंचकूला विशेष प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कोर्ट ने दोनों नेताओं को आरोपों से मुक्त कर दिया है और अब कोर्ट के इस फैसले से भूपिंदर सिंह हुड्डा और स्वर्गीय मोती लाल वोहरा के खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही पूरी तरह खत्म हो गई है। गौरतलब है कि मोती लाल वोहरा का 2020 में देहांत हो गया था।
उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार द्वारा इसके लिए तमाम हथकंडे अपनाए गए लेकिन सभी को न्यायपालिक पर पूरा विश्वास था और आज ये विश्वास सच साबित हो गया। अदालत ने सभी तथ्यों और दलीलों पर विचार करने पर पाया कि आरोपों का आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है, इसलिए कोर्ट ने दोनों नेताओं को केस से डिस्चार्ज कर दिया।अशोक मेहता ने बताया कि केवल तुच्छ राजनीति के लिए लंबे समय से भूपेंदर सिंह हुड्डा को परेशान किया जा रहा है इस मामले में भी भूपिंदर सिंह हुड्डा को 25 फरवरी को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से राहत मिल गई थी लेकिन इसके बाद पंचकूला की ईडी अदालत में डिस्चार्ज की अर्जी दायर की गई जिसी फैसला भूपिंदर सिंह हुड्डा के पक्ष में आया है और ईडी कोर्ट का आदेश आने पर अब ये मामला पूरी तरह खत्म हो गया है।
उहोने बताया कि हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान आरोपों को समर्थन देने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं होना पाया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना मजबूत आधार के आपराधिक मुकदमा जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया के सिद्धांतों के विपरीत है। इसी आधार पर आरोप तय करने के आदेशों को रद्द कर दिया गया। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने भी सभी आरोपियों को राहत देते हुए आरोपों को समाप्त कर दिया। कोर्ट ने जांच एजेंसी द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों को आरोपों का समर्थन ना करने वाले व नाकाफी पाया। इसी आधार पर आरोपों को कमजोर पाते हुए आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया गया है।




