मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर किया टैक्स सम्बन्धी निर्णय पर पुनर्विचार का आग्रह

अम्बाला। हरियाणा के पूर्व राज्य सूचना आयुक्त एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक कुमार मेहता ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में एंट्री टोल टैक्स बढ़ने से हिमाचल के सीमावर्ती क्षेत्र में रहने वाले लोगों के अलावा हरियाणा के काला अम्ब, नारायणगढ़, संढौरा, जगाधरी, पिंजौर, कालका, पंचकूला और रायपुररानी के ऐसे लोगों पर भी आर्थिक बोझ बढ़ेगा जो अपने काम के सिलसिले में दोनों राज्यों के बीच प्रतिदिन आवागमन करते हैं. इसलिए उन्होंने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से उनके टैक्स बढ़ाने संबंधी निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है.

मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में अशोक कुमार मेहता ने कहा कि बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़ और परवाणू के सीमावर्ती हरियाणा के इलाके कालका, पिंजौर, काला अम्ब, नारायणगढ़, संढौरा, जगाधरी एवं आसपास के क्षेत्र में रहने वाले अधिकतर लोग रोजमर्रा के कामकाज, व्यापार और नौकरी के सिलसिले में हिमाचल प्रदेश के क्षेत्रों में आने-जाने वाले लोगों के लिए यह वृद्धि आर्थिक बोझ बन सकती है। इसलिए सीमावर्ती इलाके के लोगों को विशेष रियायत देकर एंट्री टोल टैक्स कम किया जाए। इसी प्रकार से हिमाचल के दूसरे छोर सिरमौर जिले के काला अंब औद्योगिक क्षेत्र के साथ लगते हरियाणा के नारायणगढ़, रायपुर रानी, संढौरा अधिक क्षेत्र के लोगों को भी आर्थिक बोझ के रूप में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इन सभी क्षेत्रों के लोगों ने मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत तौर पर मिलकर टोल टैक्स में छूट देने की मांग की थी।
अशोक कुमार मेहता ने उल्लेख किया कि इससे पूर्व भी पंचकूला- शिमला नेशनल हाईवे पर चंडीमंदिर स्थित बनाए गए टोल टैक्स में विशेष रियायत दिलाने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर पिंजौर, कालका, पंचकूला के आसपास के लोगों को टोल टैक्स में विशेष छूट दिलवाने का काम करवाया था। इसके परिणामस्वरूप अब चंडी मंदिर टोल प्लाजा के 10 किलोमीटर दायरे में रहने वाले लोगों को केवल 150 रुपए मासिक शुल्क ही देना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बद्दी, नालागढ़, काला अम्ब औद्योगिक क्षेत्र एवं परवाणु की कंपनियों में कार्यरत अधिकतर कर्मचारी हिमाचल प्रदेश के निवासी हैं जो पिंजौर कालका, नारायणगढ़ एवं आसपास के क्षेत्र में रहते हैं बढ़े हुए टोल टैक्स की सबसे अधिक मार उन्ही पर पड़ेगी। इतना ही नहीं, हरियाणा एवं आसपास के क्षेत्र के लोगों की दुकानें और कई कंपनियां हिमाचल प्रदेश में है उन पर भी इस बड़े हुए टोल टैक्स की मार पड़ेगी।

खासकर छोटे व्यापारियों, टैक्सी चालकों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाएगी। बढ़े हुए टोल के कारण माल ढुलाई की लागत भी बढ़ेगी जिसका असर सीधे तौर पर हिमाचल प्रदेश में बिकने वाली वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। इससे न केवल कारोबार प्रभावित होगा, बल्कि हिमाचल प्रदेश के उपभोक्ताओं को भी महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि बद्दी, नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र को हिमाचल प्रदेश की आर्थिक राजधानी( फाइनेंशियल कैपिटल) के तौर पर देखा जाता है हिमाचल के कुल बजट का अधिकतर हिस्सा यहीं के औद्योगिक क्षेत्र से जाता है यदि हिमाचल प्रदेश के विकास में अपना योगदान देने वाले कर्मचारीयों, व्यापारियों एवं अन्य लोगों पर इस बढ़े हुए टोल टैक्स का असर पड़ा तो लोगों सहित राज्य सरकार पर भी इसका असर पड़ेगा, क्योंकि हिमाचल के औद्योगिक क्षेत्र में दुकानदार व्यापारी और कंपनियों में अपनी सेवाएं देकर कर्मचारी प्रदेश का राजस्व बढ़ाने में अपना योगदान देते हैं।
इसलिए उनका मुख्यमंत्री से आग्रह है कि हिमाचल प्रदेश सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करे और सीमावर्ती क्षेत्रों के 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों के लिए विशेष रियायत या पास की व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें बार-बार और अधिक टोल टैक्स न देना पड़े।

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