प्रतापनगर। क्षेत्र के स्टोन क्रशर जोन (बल्लेवाला, बेलगढ़ और भूड़कलां) से निकलने वाले कच्चे खनिज के अवैध खेल को रोकने के लिए प्रशासन की रणनीति धरातल पर नाकाम साबित हो रही है। हैरानी की बात यह है कि जिस भूड़कलां पुल को अवैध खनन रोकने का मुख्य केंद्र (चेक-प्वाइंट) होना चाहिए था, उसे नजरअंदाज कर नाका वहाँ से एक किलोमीटर दूर HPGCL कार्यालय के सामने लगाया गया है। प्रशासन की इस रणनीतिक चूक का सीधा फायदा खनन माफिया उठा रहा है। भूड़कलां पुल से ऐसे चार रास्ते निकलते हैं, जो वाहनों को मुख्य नाके तक पहुँचने ही नहीं देते। सवाल यह है कि इन वाहनों के पास अगर बिल या ई-रवाना होता तो वह मेन चेक पोस्ट के सामने से क्यों नहीं गुजरते।

चेकपोस्ट की गलत लोकेशन का फायदा

स्टोन क्रशर जोन बल्लेवाला, बेलगढ़ और भूड़कलां के प्लांटों तक कच्चा खनिज पहुँचाने और तैयार माल ले जाने के लिए सबसे सुगम रास्ता ‘भूड़कलां पुल’ है। नियमतः नाका इसी पुल पर होना चाहिए था, लेकिन इसे यहाँ से 1 किलोमीटर आगे HPGCL ऑफिस के सामने लगाया गया है। इसका नतीजा यह है कि पुल से ही वाहन चार अलग-अलग दिशाओं में मुड़ जाते हैं और नाके तक पहुँचते ही नहीं।

जो यह नाके लगाए गए है उनका मकसद है कि रेत-बजरी या पत्थर से भरे वाहनों के बिल व ई-रवाना चेक करना, क्योंकि चाहे कच्ची खनिज सामग्री हो या तैयार माल सबके पास ई-रवाना होना जरुरी है। पूरे जिले में इस तरह के नाके लगाए गए है तो आखिर यहां मुख्य खनन क्षेत्र में कच्चे या लिंक रोडस से गुजरने की मंजूरी कैसे दी जा सकती है।

तथ्यों के साथ: ये हैं वो 4 ‘चोर रास्ते’

  1. नहर की उत्तर पटरी (बहादुरपुर मार्ग): भूड़कलां पुल से ताजेवाला की ओर जाने वाली यमुना नहर की उत्तर पटरी का उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है। यह रास्ता कमर्शियल रूट नहीं है, फिर भी दिन भर यहाँ से ओवरलोड वाहन बहादुरपुर होते हुए नेशनल हाईवे पर पहुँच रहे हैं।

  2. नहर की दक्षिण पटरी (शिव मंदिर मार्ग): भूड़कलां शिव मंदिर से ताजेवाला जाने वाला यह रास्ता जंगल और नहर के बीच से गुजरता है। भारी वाहनों के दबाव से नहर की पटरी जगह-जगह से धंस चुकी है और आस-पास लगे पेड़ों की जड़ें तक बाहर निकल आई हैं।

  3. डेकड़ी वाला लिंक रोड: भूड़कलां पुल से डेकड़ी वाला और नैनावाली की ओर जाने वाला यह लिंक रोड अवैध खनन के परिवहन का मुख्य मार्ग बन चुका है। अवैध खनन का सारा माल इसी रास्ते से सीधा क्रशर जोन में पहुँच रहा है।

  4. पंचायती व HPGCL जमीन का कच्चा रास्ता: मांडेवाला गांव से थोड़ा पहले एक कच्चा रास्ता सीधा ताजेवाला और गौसदन एरिया को जोड़ता है। ताजेवाला एरिया से होने वाले अवैध खनन को इसी रास्ते से खपाया जा रहा है।

ट्रैक्टर-ट्रालियों का ‘शॉर्टकट’, विभाग मौन

जहाँ मुख्य नाके के सामने से केवल बड़े ट्राले या डंपर ही गुजरते हैं, वहीं अवैध खनन में लिप्त ट्रैक्टर-ट्रालियां इन्हीं संकरे लिंक रोड और कच्चे रास्तों का इस्तेमाल कर निकल जाती हैं। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने लिंक रास्तों को तोड़ रहे ओवरलोड वाहनों के आवागमन लंबे समय से चुप्पी साधी हुई है।


आधिकारिक पक्ष: “करेंगे सख्त कार्रवाई”

इस गंभीर लापरवाही पर सिंचाई विभाग के अधीक्षक अभियंता (SE) प्रवीण गुप्ता ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा:

“नहर के रास्तों का उपयोग अवैध परिवहन के लिए हो रहा है, इसकी जानकारी मुझे फिलहाल नहीं थी क्योंकि मैंने कुछ ही दिन पहले कार्यभार संभाला है। मैं तुरंत संबंधित एक्सईएन (XEN) को निर्देश जारी करूँगा कि वे मौके पर जाकर जांच करें और इन रास्तों पर अवैध आवागमन रोकने के लिए सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें।”

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