खैर की लकड़ी सहित गाड़ी को किया काबू, आरोपी फरार, पुलिस को दी शिकायत
यमुनानगर (छछरौली): रिर्जव फारेस्ट बीड़ ताहरपुर से काटे गए खैर के पेड़ों की लकड़ी से भरी गाड़ी को वन विभाग के स्टाफ ने लेदी गांव के पास दबोच लिया। खैर तस्कर गाड़ी से उतर कर भागने में सफल हो गए। गाड़ी से 45 पीस खैर के टुकड़े बरामद हुए। वन विभाग ने ममीदी गांव निवासी गाड़ी मालिक समेत चार आरोपियों के खिलाफ पुलिस को शिकायत देकर कार्रवाई करने को कहा है। वन विभाग द्वारा लगाए नाके पर खड़े स्टाफ को खैर तस्करों ने गाड़ी से कुचलने का प्रयास भी किया। जिसमें कर्मचारी बाल-बाल बचे।
तड़के 5:30 बजे मिली गुप्त सूचना और नाकाबंदी
घटनाक्रम की शुरुआत मंगलवार सुबह करीब 5:35 बजे हुई। वन रक्षक अंकित कुमार (इन्चार्ज कोट बीट) को एक विश्वसनीय मुखबिर से सूचना मिली कि तस्करों का एक गिरोह अशोक लेलैंड दोस्त (HR58C-1334) गाड़ी में भारी मात्रा में प्रतिबंधित खैर की लकड़ी लादकर जाटांवाला गांव से निकलने वाला है।
सूचना की गंभीरता को देखते हुए, अंकित कुमार ने तुरंत, वन दरोगा बृजमोहन को सूचित किया और कोट चौकी के पास जाल बिछाया गया।
मौत से सामना: तस्करों का जानलेवा हमला
जैसे ही संदिग्ध गाड़ी आती दिखाई दी, वन दरोगा बृजमोहन ने हाथ से रुकने का इशारा किया। लेकिन तस्करों ने रुकने के बजाय गाड़ी की रफ्तार बढ़ा दी और सीधे नाके पर खड़े वन कर्मियों की तरफ गाड़ी मोड़ दी। टीम के सदस्यों ने फुर्ती से पीछे हटकर अपनी जान बचाई। इसके बाद, वन विभाग की टीम ने अपनी सरकारी महिंद्रा बोलेरो कैंपर (HR22GV-2707) से तस्करों का पीछा शुरू किया।
खेतों के रास्ते फरार हुए आरोपी, गाड़ी और लकड़ी बरामद
लगातार हाई-स्पीड ड्रामे के बाद, लेदी-खिजराबाद रोड के पास तस्करों की गाड़ी को घेर लिया गया। खुद को फंसता देख गाड़ी में सवार तीन मुख्य आरोपी—भूरा (निवासी जाटांवाला), राकिब(निवासी जाटांवाला) और शकील उर्फ भूरा (निवासी डारपुर) गाड़ी छोड़कर झाड़ियों और खेतों का फायदा उठाकर फरार हो गए।
जब गाड़ी की तलाशी ली गई, तो उसमें से खैर की लकड़ी के 45 कीमती नग बरामद हुए। वन विभाग की जांच में सामने आया है कि गाड़ी का मालिक निसार (निवासी मुमीदी) है।
पुराना अपराधी है मुख्य आरोपी भूरा
रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्य आरोपी भूरा एक आदतन अपराधी है। उसके खिलाफ पहले भी सितंबर 2019 में छछरौली थाने में वन अपराध (FIR 0148) का मामला दर्ज हो चुका है। विभाग का मानना है कि यह एक संगठित गिरोह है जो आरक्षित जंगलों से कीमती लकड़ियों की चोरी करता है।
प्रमुख बिंदु और कानूनी कार्रवाई:
| विवरण | जानकारी |
| बरामद सामग्री | 45 नग खैर की लकड़ी (बिना छिले और छिले हुए) |
| प्रयुक्त वाहन | अशोक लेलैंड दोस्त (HR58C-1334) |
| मुख्य धाराएं | भारतीय वन अधिनियम 1927, पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम 1900 |
| नई धाराएं | भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत हत्या के प्रयास और सरकारी कार्य में बाधा की धाराएं |
वन विभाग ने पुलिस को लिखित शिकायत देकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।




