• वाइल्ड लाइफ विंग का कहना है कि जांच केवल सेंचुरी एरिया तक सीमित न हो, वन विभाग का एरिया भी शामिल हो

पंचकूला। हरियाणा के वन विभाग में प्रशासनिक खींचतान एक नए मोड़ पर पहुँच गई है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन ने विभाग के ही पीसीसीएफ (HoFF) द्वारा जारी एक हालिया आदेश को ‘प्रशासनिक अतिरेक’ (Administrative Overreach) बताते हुए तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। यह पूरा विवाद पंचकूला और यमुनानगर के सेंचुरी फारेस्ट एरिया में खैर के कीमती पेड़ों की बड़े पैमाने पर हुई अवैध कटाई की जांच और क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) को लेकर शुरू हुआ है।

क्षेत्राधिकार का उल्लंघन और आदेश की वापसी

मुख्य वन्यजीव वार्डन द्वारा 19 मार्च 2026 को जारी आदेश के अनुसार, पीसीसीएफ (HoFF) हरियाणा ने 17 मार्च 2026 को कलेसर नेशनल पार्क और अभयारण्य में जांच के लिए एक समिति गठित की थी। वन्यजीव वार्डन ने इस आदेश को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 33 के तहत नेशनल पार्क और अभयारण्यों के प्रबंधन और जांच का एकमात्र अधिकार मुख्य वन्यजीव वार्डन के पास है। आदेश में स्पष्ट किया गया कि HoFF द्वारा गठित समिति बिना उचित अधिकार क्षेत्र के बनाई गई थी, जो नियमों का उल्लंघन है।

खैर तस्करों पर ‘नरमी’ दिखाने पर सवाल

दस्तावेजों में एक बेहद गंभीर तथ्य यह सामने आया है कि 10 मार्च 2026 को वन मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में वन विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए थे। यह पाया गया कि अधिकारी नेशनल पार्क और अभयारण्यों में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई होने पर ‘वन्यजीव अधिनियम 1972’ की सख्त धाराओं (जिसमें 3 साल की जेल का प्रावधान है) के बजाय ‘भारतीय वन अधिनियम 1927’ के तहत मामूली जुर्माना (Compounding) लगाकर मामला रफा-दफा कर देते थे। आरोप है कि इसी कानूनी ढील के कारण तस्करों के हौसले बढ़े और लेपर्ड (तेंदुए) जैसे वन्यजीव रिहायशी इलाकों की ओर रुख करने लगे।

फारेस्ट एरिया में जांच के आदेश नहीं, केवल वाइल्ड लाइफ एरिया में जांच पर सवाल

रिपोर्ट्स के अनुसार, पिंजौर के HMT क्षेत्र और पंचकूला के PLPA (धारा 4 और 5) के तहत आने वाले क्षेत्र में खैर के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हुई है। मुख्य वन्यजीव वार्डन ने नोट किया कि HoFF द्वारा कलेसर नेशनल पार्क व सेंचुरी एरिया के लिए जो आदेश दिया गया था, वह पंचकूला जिला में सेक्शन 4 ओर 5 के अलावा वन क्षेत्र में हो रही अवैध कटाई पर पूरी तरह ‘मौन’ था। इसी विसंगति को देखते हुए पुराने आदेश को रद्द कर अब नए सिरे से जांच के निर्देश दिए गए हैं।

नई जांच समिति का गठन और 15 दिन की समयसीमा

प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य वन्यजीव वार्डन ने अब खुद एक नई उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति की कमान सुभाष चंद्र यादव (IFS, CF साउथ सर्कल) को सौंपी गई है। समिति के अन्य सदस्यों में पुष्कर राज (IFS), राजेश माथुर (ACF) और ऋषि राज (HFS) शामिल हैं। इस समिति को कलेसर नेशनल पार्क में खैर की कटाई और वन्यजीव आवास के नुकसान का आकलन कर 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है।

सरकार और मंत्री को भेजी गई इस आदेश की कापी

इस फैसले की प्रति हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (पर्यावरण एवं वन) और वन मंत्री के कार्यालय को भी भेज दी गई है। जिसमें कहा गया है कि वनीय क्षेत्र पिंजौर-मोरनी के साथ, यमुनानगर डिविजन में हो चुके खैर के अवैध कटान की जांच के लिए कमेटी बनाई जाए, ताकि इस तरह वन्य अपराध को पूरी तरह से रोका जा सके।

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