चंडीगढ़। राजधानी में मंगलवार को वन एवं वन्य जीव मंत्री की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में आसरेवाली सेंचुरी क्षेत्र में अवैध कटान का मामला प्रमुखता से उठा। बैठक में 2021 से 2026 के बीच सामने आए मामलों की कार्रवाई पर चर्चा की गई और कई मामलों को जुर्माना लेकर निपटाने पर सवाल उठाए गए।
मुख्य बिंदु:
• बैठक में प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट आसरेवाली में अवैध कटान के मामलों की समीक्षा की गई।
• वर्ष 2021 से 2026 तक करीब 50 मामलों का रिकॉर्ड सामने आया।
• इनमें से लगभग 38 मामलों को जुर्माना लेकर निपटा दिया गया।
• केवल 12 या 13 मामलों को ही कोर्ट में भेजा गया।
• वन्य जीव विभाग के अधिकारियों ने इतने मामलों को कंपाउंडेबल ऑफेंस मानकर निपटाने पर आपत्ति जताई।
कानूनी प्रावधानों पर मतभेद
• वन विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि संबंधित एक्ट के तहत यह अपराध कंपाउंडेबल है और इसमें जुर्माना लगाकर मामला निपटाया जा सकता है।
• वहीं वाइल्ड लाइफ विंग का कहना है कि ऐसे मामलों को कोर्ट में ले जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि जुर्माना लेकर छोड़ने का प्रस्ताव तो उनके पास भी आया था, लेकिन पर्यावरण अपराध करने वालों को सजा मिलनी चाहिए।
सरपंच ने भी दिया था प्रस्ताव
• संबंधित गांव के सरपंच और अन्य लोगों ने वाइल्ड लाइफ विंग को लिखित में बताया था कि यदि मामले को जुर्माना लेकर निपटाया जाए तो वे आरोपियों से राशि भरवा सकते हैं।
• इस संबंध में डीडब्ल्यूएलओ द्वारा पुलिस कमिश्नर को जो पत्र लिखा गया है, उसमें भी यह बताया गया।
पीसीसीएफ का बयान
इस मामले पर पीसीसीएफ और चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन डॉ. विवेक सक्सेना का कहना है कि अगर अपराध कंपाउंडेबल भी हो, तब भी आरोपियों को कोर्ट के माध्यम से सजा दिलाना बेहतर होता, ताकि भविष्य में इस तरह के अपराधों पर रोक लग सके। उन्होंने कहा कि केवल जुर्माना लेकर मामलों को छोड़ देना उचित नहीं माना जा सकता ओर यह जांच का विषय है।



