• जांच कमेटी की रिपोर्ट में पुष्टि, पर ‘ड्यूटी में चूक नहीं’ के दावे ने खड़े किए सवाल

कलेसर, यमुनानगर। सरकारी जंगलों में केवल अवैध कटान ही नहीं अवैध खनन भी हो रहा है। यमुनानगर डिविजन की कलेसर रेंज के मांडेवाला(बेलीभूड़) जंगल में अवैध खनन की पुष्टि जांच कमेटी द्वारा की गई है। इस एरिया में निशानदेही के बाद यह बात सामने आई थी कि पहले भी वन क्षेत्र में अवैध खनन हुआ था इसके साथ ही ताजा अवैध खनन के निशान भी पाए गए। जिसकी एफआईआर 23 जनवरी 2026 को स्टेट एनफोर्समेंट ब्यूरो द्वारा दर्ज की गई है। जिसकी वन अपराध रिपोर्ट 16 जनवरी को दर्ज की गई, यानी वन क्षेत्र में लगातार अवैध खनन चलता रहा।

बेलगढ़ एरिया में मांडेवाला जंगल के समीप हरियाणा व यूपी के बार्डर एरिया में अवैध खनन का मसला काफी गर्म हुआ था।इस मामले में एसडीएम समेत तमाम अधिकारियों ने कई बार मौके का दौरा किया व इस मामले में एफआईआर के आदेश हुए थे। बताया जाता है कि इस फारेस्ट एरिया में भी अवैध खनन पाया गया, जो कि मांडेवाला वन क्षेत्र का हिस्सा था। 

इस संबंध में विभाग द्वारा एक आरएफओ के नेतृत्व में जांच कमेटी बनाई गई। यह रिपोर्ट क्रमांक 1091 दिनांक 11 फरवरी 2026 को वन मंडल अधिकारी को भेजी गई। इस रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि वन क्षेत्र में पहले भी अवैध खनन हुआ था, उसके बाद भी ताजा अवैध खनन के निशान पाए गए। कमेटी ने जो रिपोर्ट विभाग को सौंपी थी, उसके अनुसार 3 फरवरी 2026 को मांडेवाला जंगल में हुए अवैध खनन की शिकायत का मौका निरीक्षण किया गया। जिसमें 15 जनवरी 2026 में इस एरिया की हुई निशानदेही का जिक्र किया गया है। जिसमें खनन विभाग व राजस्व विभाग द्वारा भाग लिया गया। इसमें वन विभाग का स्टाफ भी मौके पर मौजूद था।

इस निशानदेही में पता चला कि इस नदी का कुछ क्षेत्र वन भूमि का है। जिसकी मौके पर निशानदेही के उपरांत पता चल कि वहां पर अवैध खनन हुआ है। जो पुरानी प्रतीत होती है। कुछ ताजा अवैध खनन के निशान भी मिले हैं। जिसकी वन विभाग द्वारा एफओरआर 036/0223 दिनांक 16 जनवरी 2026 को दर्ज की गई। इसके लिए खनन अधिकारी को एफआईआर के लिए भी लिखा गया। स्टेट एनफोर्समेंट ब्यूरो द्वारा एफआईआर नंबर 35 दिनांक 23 जनवरी 2026 को दर्ज की गई।

रिपोर्ट में यह चीज स्प्ष्ट रुप से सामने आई कि मौका निरीक्षण के दौरान यह देखने में आया कि खनन माफिया द्वारा वन क्षेत्र में पहले भी अवैध खनन किया गया। जो पुराना प्रतीत होता है। इसके अलावा वन भूमि में ताजा अवैध खनन भी पाया गया। उसकी वन अपराध रिपोर्ट भी वन विभाग द्वारा दर्ज कर दी गई, ओर इस बारे में जिला खनन अधिकारी को वन भूमि में हुए अवैध खनन के बारे पत्र लिखा गया, यानी वन विभाग की जांच टीम ने वन क्षेत्र में हुए अवैध खनन की पुष्टि कर दी

अब आगे रिपोर्ट में लिखा जाता है कि उक्त अवैध खनन में किसी कर्मचारी का कोई दोष प्रतीत नहीं होता, विभाग के कर्मचारियों/अधिकारियों द्वारा डयूटी का निर्वहन ठीक प्रकार से किया गया है, यानी रेंज स्टाफ को क्लीन चिट देने का प्रयास किया गया।

ऐसे में फारेस्ट एरिया में अवैध खनन की जिम्मेदारी केवल खनन माफिया की ही लगती है।

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