ताजेवाला, यमुनानगर। ताजेवाला क्षेत्र में अवैध खनन पर प्रशासनिक सख्ती के तमाम दावों के बावजूद खनन माफिया बेखौफ होकर सक्रिय है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि खेती योग्य जमीनों, पंचायत भूमि और जंगल से सटी प्राइवेट जमीनों को भी बेतहाशा खोदकर गहरे गड्ढों में तब्दील कर दिया गया है।
खनन माफिया न सिर्फ खुलेआम अवैध खुदाई कर रहा है, बल्कि पंचायत द्वारा लगाए गए अवरोधकों और बेरीकेड्स को तोड़कर प्रशासन को सीधी चुनौती दे रहा है। दिन और रात दोनों समय ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपरों से अवैध खनिज का परिवहन जारी है।

📍 भूड़कलां-ताजेवाला रास्ता बना ‘खनन कॉरिडोर’
भूड़कलां से ताजेवाला जाने वाले कच्चे रास्ते के आसपास की जमीन को इस कदर खोद दिया गया है कि कई जगह यह नहरों से भी अधिक गहरी दिखाई दे रही है। यही रास्ता अवैध खनिज को क्रशर जोन तक पहुंचाने का मुख्य जरिया बना हुआ है।
इस मार्ग से पंचायत भूमि के साथ-साथ एचपीजीसीएल की जमीन भी लगती है, जिससे सरकारी संपत्ति को भी नुकसान हो रहा है।

⚠️ पंचायत के बेरीकेड तोड़ डाले
ताजेवाला पंचायत ने कुछ दिन पहले अवैध परिवहन रोकने के लिए रास्ते पर लोहे के एंगल व बेरीकेड लगाए थे, लेकिन खनन माफिया ने इन्हें तोड़ दिया।
5 फरवरी को पंचायत ने बीडीपीओ प्रतापनगर को प्रस्ताव भेजकर बताया कि लोहे के एंगल तोड़कर रास्ता दोबारा खोल दिया गया,सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।

📝 प्रशासन को शिकायत, कार्रवाई की मांग
बीडीपीओ प्रतापनगर ने मामला थाना प्रबंधक प्रतापनगर को भेजते हुए अवैध रूप से रास्ता खोलने और खनन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए कहा है

🔴 पहले भी हो चुकी है कोशिश, फिर भी नहीं रुका खेल
बताया जाता है कि पंचायत ने कई बार रास्ता बंद करने की कोशिश की, लेकिन हर बार माफिया अवैध तरीके से रास्ता खोल लेता है। लगातार शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से माफिया के हौसले बुलंद हैं।

❓ कहां जा रहा है खनिज? जांच की उठी मांग
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि ताजेवाला से निकाला गया खनिज किन-किन प्लांटों में पहुंच रहा है।भूड़कलां व बल्लेवाला क्षेत्र के क्रशर प्लांटों की जांच हो। डिमांड पर रोक लगे तभी अवैध खनन रुकेगा
क्षेत्रवासियों का मानना है कि सिर्फ रास्ता बंद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अवैध खनिज खरीदने वाले प्लांटों पर कार्रवाई जरूरी है।

पंचायत कार्रवाई के नाम पर केवल बीडीपीओ कार्यालय में शिकायत दे सकता है वहीं बीडीपीओ कार्यालय भी केवल अपने अधिकारियों तक या पुलिस तक शिकायत दे सकता है। अवैध खनन मामले में इससे अधिक पावर न होने के कारण ब्लाक स्तर के अधिकारियों के हाथ बंधे हुए है।

खनन विभाग कहीं दिखाई नहीं देता, जबकि अधिकतर पावर्स विभाग के स्टाफ के पास है ऐसे में जब तक जवाबदेही तय नहीं की जाएगी तो अवैध खनन रोकना मुशिकल ही लगता है।

 

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