यमुनानगर। प्रतापनगर ब्लॉक के गांव किशनपुरा गांव की पंचायत की 45 एकड़ भूमि पर कृषि महाविद्यालय का निर्माण किया जाएगा। इससे क्षेत्र के युवाओं को उच्च कृषि शिक्षा अपने जिले में ही उपलब्ध हो सकेगी। हरियाणा सरकार के विकास एवं पंचायत विभाग ने पंचायत की इस भूमि को चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय, हिसार को 33 वर्षों की अवधि के लिए लीज पर देने की मंजूरी प्रदान कर दी है।

सरकारी स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार यह निर्णय ग्राम पंचायत किशनपुरा द्वारा भेजे गए प्रस्ताव, उपायुक्त यमुनानगर की संस्तुति तथा विभागीय स्तर पर विस्तृत विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या बढ़ाना और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना है।

दिसंबर 2025 में मिली थी सैद्धांतिक मंजूरी

किशनपुरा में कृषि महाविद्यालय स्थापित करने के लिए पंचायत की जमीन देने के प्रस्ताव को दिसंबर 2025 में ही सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई थी। इसके बाद उपायुक्त यमुनानगर ने 16 जनवरी 2026 को बीडीपीओ प्रतापनगर को पत्र जारी कर सूचित किया कि हरियाणा सरकार के आदेश क्रमांक 2560 दिनांक 23 दिसंबर 2025 के अनुसार पंचायत की 45 एकड़ जमीन को 33 वर्षों के लिए चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय, हिसार को मात्र एक रुपया प्रति एकड़ की दर से लीज पर देने की स्वीकृति प्रदान की गई है।

डीसी ने पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए कि लीज डीड की औपचारिक प्रक्रिया जल्द पूरी कर उसकी प्रति उपायुक्त कार्यालय में भेजी जाए।

बीडीपीओ ने सरपंच को भेजा पत्र

उपायुक्त के आदेशों के बाद बीडीपीओ प्रतापनगर ने 21 जनवरी 2026 को संबंधित सरपंच को पत्र लिखकर लीज डीड की कार्रवाई शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि ग्राम पंचायत की ओर से आवश्यक प्रस्ताव बीडीपीओ कार्यालय भेज दिया गया है। अब लीज डीड के पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होते ही कृषि महाविद्यालय के निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।

क्षेत्र को मिलेंगे कई फायदे

कृषि महाविद्यालय खुलने से यमुनानगर जिले और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को कृषि विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए हिसार या अन्य दूरस्थ जिलों में नहीं जाना पड़ेगा। स्थानीय युवाओं को पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। इसके अलावा आधुनिक खेती, उन्नत बीज, मृदा परीक्षण, सिंचाई तकनीक और कृषि नवाचारों की जानकारी किसानों तक सीधे पहुंचेगी, जिससे क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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