दूसरे राज्यों से खनिज लेकर आने वाले वाहनों पर प्रदेश सरकार ने 80 रुपये प्रति मीट्रिक टन लागू किया था आईएसटीपी
केवल हिमाचल पावंटासाहिब से आने वाली गाड़ियों से टैक्स का अनुमान लगाया जाए तो करोड़ो का बनता है टैक्स, टैक्स वसूला भी गया या नहीं इसका पता नहीं
यमुनानगर। प्रदेश सरकार ने दूसरे राज्यों से हरियाणा में रेत-बजरी व अन्य खनिज (मिनरल्स) लाने के लिए इंटरस्टेट ट्रांजिट पास (ISTP) योजना लागू की थी। इसके तहत 80 रुपये प्रति मीट्रिक टन की दर से टैक्स वसूली का प्रावधान किया गया। यानी यदि किसी वाहन में 40 टन खनिज लोड है, तो करीब 3200 रुपये टैक्स सरकार को मिलना चाहिए। यह व्यवस्था 19 अगस्त 2025 से प्रभावी की गई थी।
लेकिन लगभग पांच माह बीत जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है—यमुनानगर जिले में आईएसटीपी से अब तक कितना टैक्स जमा हुआ? जवाब किसी के पास नहीं।
नियम लागू—पर अमल पर सवाल
हरियाणा सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए सभी खनिजों पर एक समान 80 रुपये प्रति मीट्रिक टन शुल्क लागू किया। इसे 19 अगस्त 2025 से पूरी तरह प्रभावी कर दिया गया। सरकार का दावा था कि इससे:
राजस्व में भारी बढ़ोतरी होगी
अवैध खनन पर अंकुश लगेगा
सड़कों को नुकसान पहुंचाने वाले ओवरलोड खनिज वाहनों पर नियंत्रण होगा
कागजों में सब कुछ दुरुस्त, मगर जमीनी हकीकत सवालों के घेरे में है।
यमुनानगर में रोज़ाना हजार वाहन, बीते पांच माह में कितना टैक्स वसूला गया
सूत्रों के अनुसार पांवटा साहिब यमुनानगर एरिया से प्रतिदिन करीब 500 से 800 खनिज वाहन यमुनानगर में प्रवेश करते रहे हैं। यदि हर वाहन औसतन 40 टन माल लेकर आता है, तो:
एक ट्रक से टैक्स: 3200 रुपये
प्रतिदिन अनुमानित टैक्स: 25 से 30 लाख रुपये से अधिक
5–6 माह में अनुमानित टैक्स: करोड़ों रुपये
इसके बावजूद अब तक जमा राजस्व के आंकड़े सामने नहीं आ पा रहे हैं। न ही कोई अधिकारी ठोस जानकारी दे पा रहा है कि कितना टैक्स वसूला गया और कितना नहीं।
सूत्र बताते हैं कि अधिकांश खनिज वाहनों ने आईएसटीपी टैक्स जमा ही नहीं कराया। तमाम नाकाबंदी, चेक पोस्ट और दावों के बावजूद राजस्व को अगर नुकसान पहुंचा है तो उसकी जवाबदेही किसकी है। यदि यह सही है, तो सवाल सीधे तौर पर निगरानी तंत्र और जिम्मेदार अधिकारियों पर उठता है। हालांकि मामला अब उठ रहा है तो पावंटा साहिब से आने वाले वाहनों की संख्या घटती जा रही है।
इस मामले में जिला खनन अधिकारी राजेश सहरावत का कहना है कि हाल के दिनों में चेकिंग के दौरान कई वाहन पकड़े गए हैं, जिनके पास आईएसटीपी नहीं था। और लगातार जांच जारी है। इसको लेकर सख्ती की गई है।
लेकिन मूल सवाल जस का तस है—
पिछले पांच माह में जो हजारों वाहन खनिज लेकर प्रदेश में आए, उनसे कितना टैक्स जमा हुआ
यदि नहीं मिला, तो जिम्मेदारी किसकी है?
बड़ी जांच की दरकार
आईएसटीपी जैसी महत्वपूर्ण योजना में करोड़ों के संभावित राजस्व का हिसाब न मिलना, केवल लापरवाही नहीं—सिस्टम फेलियर या बड़ी गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।
अब जरूरत है:
जिला व राज्य स्तर पर विशेष ऑडिट की
19 अगस्त 2025 से अब तक के ISTP डेटा को सार्वजनिक करने की
जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की





