चंडीगढ़। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के प्रमुख अरशिन्दर सिंह चावला ने पदभार संभालते ही भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति को जमीन पर उतारने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए हैं। इसी क्रम में उन्होंने प्रदेश के सभी रेंज के पुलिस अधीक्षकों सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित कर ब्यूरो की प्राथमिकताओं, कार्यप्रणाली और भविष्य की रणनीति को लेकर स्पष्ट, कड़े और समयबद्ध दिशा-निर्देश जारी किए। बैठक में भ्रष्टाचार के विरुद्ध चल रहे अभियानों की समीक्षा के साथ-साथ आगामी कार्ययोजना पर भी गहन मंथन किया गया।
भ्रष्टाचार पर निर्णायक प्रहार की स्पष्ट रणनीति
बैठक के दौरान भ्रष्टाचारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध प्रभावी, त्वरित और कानूनी रूप से मजबूत कार्रवाई को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। चावला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ब्यूरो की कार्यप्रणाली इतनी सशक्त, पारदर्शी और विश्वसनीय होनी चाहिए कि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत लेने से पहले सौ बार सोचने को मजबूर हो जाए। उन्होंने कहा कि विजिलेंस ब्यूरो का प्रभाव और भय भ्रष्टाचारियों के मन में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होना चाहिए, ताकि सरकारी कार्यों के बदले रिश्वत लेने जैसी जघन्य प्रवृत्तियों पर स्थायी रोक लग सके और प्रशासनिक व्यवस्था में विश्वास मजबूत हो।
खौफ ऐसा हो कि ईमानदारी को मिले बढ़ावा
ब्यूरो प्रमुख ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि व्यवस्था को शुद्ध करना है। इसके लिए भ्रष्ट अधिकारियों एवं कर्मचारियों के मन में कानून का ऐसा खौफ पैदा किया जाना चाहिए, जिससे ईमानदार अधिकारियों का मनोबल बढ़े और वे बिना किसी दबाव या भय के अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें। उन्होंने निर्देश दिए कि रिश्वतखोरी में संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध सुनियोजित, गोपनीय और तकनीकी रूप से सुदृढ़ ट्रैप योजनाएं तैयार की जाएं, ताकि कार्रवाई शत-प्रतिशत सफल हो और किसी भी स्तर पर चूक या लापरवाही की कोई गुंजाइश न रहे।
कुख्यात रिश्वतखोरों की सूची तैयार करने के निर्देश
चावला ने कहा कि प्रत्येक जिले में कुछ ऐसे अधिकारी और कर्मचारी होते हैं जिनकी छवि सर्वविदित रूप से भ्रष्ट होती है और जो बिना रिश्वत के सरकारी कार्य करने से साफ इनकार करते हैं। ऐसे बदनाम और खुलेआम व्यवस्था को चुनौती देने वाले तत्वों की पहचान कर उनकी विस्तृत, सत्यापित और अपडेटेड सूची तैयार की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि इन मामलों में प्राथमिकता तय कर ठोस कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ब्यूरो प्रमुख ने सख्त लहजे में कहा कि भ्रष्टाचारियों को किसी भी प्रकार की गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए—आज नहीं तो कल, उन्हें कानून के शिकंजे में आना ही होगा, और हर संभव प्रयास यह होना चाहिए कि उन्हें रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए पकड़ा जाए।
ईमानदार अधिकारियों को संरक्षण और सम्मान
बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद हैं जो पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। चावला ने निर्देश दिए कि ऐसे अधिकारियों से निरंतर संवाद बनाए रखा जाए, उन्हें प्रशासनिक संरक्षण प्रदान किया जाए तथा समय-समय पर उनके उत्कृष्ट कार्यों को सार्वजनिक रूप से सराहा और पुरस्कृत किया जाए। उन्होंने कहा कि ईमानदार अधिकारियों को सम्मान और प्रोत्साहन देना भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई को और अधिक प्रभावी बनाता है।
तकनीक के अधिकतम उपयोग पर जोर
ब्यूरो प्रमुख ने सभी रेंज के पुलिस अधीक्षकों को भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में आधुनिक तकनीक के अधिकतम और सुनियोजित उपयोग के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान तकनीकी युग में सभी अधिकारियों का ‘टेक-सेवी’ होना अनिवार्य है। आधुनिक तकनीकी उपकरण न केवल ट्रैप मामलों को मजबूत और साक्ष्य-संपन्न बनाते हैं, बल्कि न्यायालय में मामलों की प्रभावी पैरवी और त्वरित निपटारे में भी अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने उपस्थित सभी अधिकारियों से आह्वान किया कि तकनीक को अपनी कार्यशैली का अभिन्न हिस्सा बनाते हुए भ्रष्टाचार के विरुद्ध इस अभियान को और अधिक धारदार बनाया जाए।




