हथिनीकुंड, यमुनानगर। हथिनीकुंड से खनिज सामग्री से भरे वाहन तय और स्वीकृत मार्गों को छोड़कर नहरों की पटरी और जंगलों के रास्तों से बल्लेवाला क्रशर जोन तक पहुंचाए जा रहे हैं। बीते एक सप्ताह से अधिक समय से यह वाहन प्रतापनगर–हथिनीकुंड हाइवे से गुजरने की बजाय ताजेवाला से भूड़कलां डब्लयूजेसी नहर की पटरी के सहारे निकाले जा रहे हैं।सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि कमजोर पुलों, नहरों और जंगलों के बीच से होकर गुजरने वाले रास्तों का उपयोग खनिज सामग्री के परिवहन के लिए किया जा रहा है, जबकि नियमानुसार इन मार्गों का इस्तेमाल न तो कमर्शियल परिवहन के लिए होता है और न ही ओवरलोड भारी वाहनों के लिए इसकी अनुमति है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मूक सहमति से यह कार्य चल रहा है।
बताया जा रहा है कि हथिनीकुंड डायाफ्राम वॉल निर्माण क्षेत्र से निकलने वाली खनिज सामग्री को क्रशिंग या वाशिंग के लिए बल्लेवाला क्रशर जोन में लाया जा रहा है। मगर इसके लिए जिस रूट का चयन किया गया है, वही पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला रहा है। हथिनीकुंड से पांवटा–प्रतापनगर नेशनल हाइवे एक सीधा और स्वीकृत मार्ग है, इसके बावजूद वाहन ताजेवाला में सिंचाई विभाग के कमजोर पुलों से होकर नहर की पटरी और जंगल के रास्ते से गुजर रहे हैं। भूड़कलां शिव मंदिर के सामने से निकलने वाले इस रास्ते का उपयोग खनिज परिवहन के लिए नहीं किया जा सकता।
बिना चेक पोस्ट कैसे होगी खनिज की निगरानी?
नियमानुसार किसी भी खनिज सामग्री का परिवहन तभी किया जा सकता है जब खनन स्थल से ई-रवाना जारी हो। इसके बाद जिस क्रशर या वॉशिंग यूनिट पर सामग्री पहुंचती है, वहां से तैयार माल के लिए दोबारा ई-रवाना जारी किया जाता है। लेकिन जब वाहन जंगलों और नहरों के छिपे रास्तों से बिना किसी चेक पोस्ट के गुजरेंगे, तो यह निगरानी कैसे संभव होगी कि किस वाहन के पास वैध ई-रवाना है और किसके पास नहीं।
एसडीएम ने माइनिंग विभाग को दिए जांच के निर्देश
इस पूरे मामले पर छछरौली के एसडीएम रोहित कुमार ने कहा कि सूचना मिलते ही माइनिंग विभाग को चेकिंग कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए गए हैं। अब देखना यह होगा कि नियमों को दरकिनार कर किए जा रहे इस खनिज परिवहन पर प्रशासन कब और कितनी सख्ती दिखाता है।





