छछरौली, यमुनानगर। उपमंडल छछरौली के रिज़र्व फॉरेस्ट एरिया में बनी सड़क से चल रहे ओवरलोड की शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। बीएंडआर को कस्बे के लोगों ने शिकायत दी है। मगर बताया जाता है कि अधिकारी कह रहे हम सड़क किसी के लिए बंद नहीं कर सकते। अधिकारी यह भी नहीं बता रहे कि आखिर लिंक रोड कितने हैवी ट्रैफिक के लिए है अगर कल को सड़क टूटती है तो आखिर जिम्मेदारी किस की है, यानी अगर जानकारी के बावजूद ओवरलोड निकल रहा है तो सब डिविजन के अधिकारियो ने अपने सीनियर्स को सूचित कर इस पर कार्रवाई के लिए कहा है कि नहीं।

बीएंडआर की इस सड़क से होकर अवैध खनिज से लदे वाहन सीधे छछरौली पंचायत की आबादी में एंट्री कर रहे हैं। पशु अस्पताल से चौक नंबर दो होते हुए गनौली गेट बाजार तक बनी मुख्य बाजार सड़क पर भारी वाहनों का दबाव बढ़ता जा रहा है, जिससे सड़क के टूटने का खतरा पैदा हो गया है। सुबह के समय मॉर्निंग वॉक पर निकलने वाले लोग भी इन वाहनों के कारण सड़क का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।
यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है। आखिर रिज़र्व फॉरेस्ट एरिया से गुजरने वाली इस सड़क पर अवैध खनिज परिवहन किस विभाग की मिलीभगत से हो रहा है? गांव के सरपंच प्रतिनिधि के अनुसार, ग्रामीणों ने इस संबंध में पीडब्ल्यूडी को लिखित शिकायत दी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

छछरौली के सब-डिवीजन बनने के बाद क्षेत्र में सुधार की जो उम्मीदें जगी थीं, वे अब धीरे-धीरे खत्म होती नजर आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध खनन और खनिज परिवहन खुलेआम चल रहा है और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं

रिज़र्व फॉरेस्ट से गुजर रही यह सड़क केवल वन्य जीवों के लिए ही खतरा नहीं बन रही, बल्कि आबादी क्षेत्र में शोर और वायु प्रदूषण का बड़ा कारण भी बन चुकी है। हालात इतने खराब हैं कि रात भर तो वाहन चलते ही हैं, सुबह सात–आठ बजे तक पंचायत की गलियों से इनका गुजरना जारी रहता है। इससे लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है और पंचायत की गलियां भी बर्बादी की कगार पर पहुंच गई हैं।
इस सड़क के दो मुख्य रास्ते हैं—एक माजरी एरिया से होकर निकलता है और दूसरा पशु अस्पताल से चौक नंबर दो होते हुए सीधे मेन बाजार में प्रवेश करता है। माजरी क्षेत्र के लोगों का कहना है कि रात भर ओवरलोड ट्रालियों की आवाजाही से नींद तक पूरी नहीं हो पा रही और घर से बाहर कदम रखते ही हादसे का खतरा बना रहता है।

नियमों के अनुसार, ग्राम पंचायत अपने स्तर पर बैरिकेड लगाकर ओवरलोड वाहनों की आवाजाही रोक सकती है, लेकिन आज तक ऐसा नहीं किया गया। जिला स्तर की बैठकों में जिम्मेदारियां तय होने के बावजूद सरेआम चल रहे इन वाहनों को कोई रोकने वाला नहीं है।
इस मामले में छछरौली पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि संजीव सैनी ने बताया कि बीएंडआर के एसडीओ को कई दिन पहले शिकायत दी गई थी, जिस पर सरपंच के भी हस्ताक्षर थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब प्रस्ताव के माध्यम से बीडीपीओ को अवगत कराने की बात कही जा रही है। वहीं, जब बीडीपीओ कार्तिक से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन समय रहते इस अवैध खनिज परिवहन पर लगाम लगाएगा या फिर रिज़र्व फॉरेस्ट से लेकर पंचायत की गलियों तक यही हालात बने रहेंगे।

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