नई दिल्ली । केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इनमें 4 विदेशी नागरिक और 58 कंपनियां शामिल हैं। जांच में सामने आया कि यह संगठित नेटवर्क देश के कई राज्यों में फैला हुआ था और डिजिटल माध्यमों से हजारों लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया।

सीबीआई के अनुसार, अक्टूबर 2025 में इस मामले में तीन मुख्य भारतीय आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह फर्जी लोन ऐप्स, नकली निवेश योजनाएं, पोंजी और एमएलएम मॉडल, फर्जी पार्ट-टाइम जॉब ऑफर और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को गुमराह कर रहा था।

यह मामला गृह मंत्रालय के अधीन I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) से मिली सूचनाओं के आधार पर दर्ज किया गया। प्रारंभ में अलग-अलग शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन सीबीआई की गहन जांच में ऐप्स, फंड ट्रांजैक्शन पैटर्न, पेमेंट गेटवे और डिजिटल फुटप्रिंट्स में समानता पाई गई, जिससे एक संगठित साजिश का खुलासा हुआ।

जांच में यह भी सामने आया कि साइबर अपराधियों ने अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया। इसमें गूगल विज्ञापन, बल्क एसएमएस, सिम-बॉक्स आधारित मैसेजिंग सिस्टम, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक प्लेटफॉर्म और कई फर्जी बैंक खातों का प्रयोग शामिल था, ताकि असली संचालकों की पहचान छिपाई जा सके।

सीबीआई ने बताया कि इस नेटवर्क की रीढ़ 111 शेल कंपनियां थीं, जिन्हें डमी डायरेक्टरों, फर्जी दस्तावेजों और झूठे पतों के जरिए पंजीकृत किया गया। इन कंपनियों के माध्यम से बैंक और मर्चेंट अकाउंट खोले गए, जिनसे अपराध की रकम को परत-दर-परत घुमाया गया। जांच में सामने आया कि इन खातों से 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का लेन-देन हुआ, जबकि एक खाते में ही 152 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जमा पाई गई।

मामले में कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, झारखंड और हरियाणा में 27 स्थानों पर छापेमारी की गई। इस दौरान डिजिटल डिवाइस, दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए गए। फॉरेंसिक जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि विदेशों से इस नेटवर्क का संचालन किया जा रहा था।

सीबीआई के अनुसार, 2020 के बाद से विदेशी हैंडलरों के इशारे पर भारत में शेल कंपनियां बनाई गईं। आरोप है कि Zou Yi, Huan Liu, Weijian Liu और Guanhua Wang नामक विदेशी नागरिक इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड थे।

सीबीआई ने विदेशी मास्टरमाइंड, उनके भारतीय सहयोगियों और 58 कंपनियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के उपयोग और अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध अधिनियम, 2019 के तहत कार्रवाई की है। यह कार्रवाई ऑपरेशन ‘चक्र-वी’ के तहत की गई है।

 

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