गुमथला, यमुनानगर। गुमथला क्षेत्र में खनन एजेंसियां रात के अंधेरे में यमुना में खनन कर रही है। जबकि एनजीटी के आदेशों के अनुसार सूर्यास्त के बाद व सूर्याेदय से पहले किसी भी प्रकार का खनन कार्य नहीं किया जा सकता है। इस एरिया में खनन को लेकर बनाए गए किसी नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। इस प्रकार नियमों के उल्लंघन को रोकना खनन विभाग व एनफोर्समेंट ब्यूरो का काम है। तमाम एजेंसियों के होने के बावजूद ऐसा होना अपने आप में एक गहरे संदेह को जन्म दे रहा है कि आखिर किसकी शह पर ऐसा किया जा रहा है।

अवैध खनन के खिलाफ व पर्यावरण को बचाने की लड़ाई लंबे समय से लड़ रहे एडवोकेट वरयाम सिंह ने जिला प्रशासन से मांग करते हुए बताया कि ग्राम गुमथला के निकट अस्थाई पुलिस चौकी से लगभग दो सौ मीटर की दूरी पर यमुना नदी में रात के समय बड़े स्तर पर अवैध खनन किया जा रहा है। खनन एजेंसियां रात के समय लगातार खनन कर रही हैं। प्रत्येक एजेंसी द्वारा लगभग बीस पोकलेन मशीनों और चालीस से पचास ट्रक, डंपर और टीपर लगाए जा रहे हैं। इस एरिया में किसी के आगमन की सूचना पहले ही मिल जाए इसके लिए सड़कों पर रेकी की जाती है जिसमें अपराधी किस्म के लोग शामिल हो सकते हैं। जबकि इस प्रकार रात को जो लोग बाइक, कारों व बड़ी-बड़ी गाड़ियों में घूमते है उनकी जांच भी नहीं की जाती है। रेक करने वाले यह लोग प्रशासन, मीडिया व क्षेत्र के जो लोग इस प्रकार के कृत्यों का विरोध करते हैं उन पर नजर बनाए रखते हैं। ताकि कोई भी इधर आए तो उसकी सूचना पहले से खनन करने वालों तक पहुंचाई जा सके।

वरयाम सिंह ने बताया कि उनकी टीम अपनी जान जोखिम में डालकर खनन गतिविधियों के वीडियो और फोटो सबूत लगातार प्रशासन को भेज रहे हैं।। इस अवैध गतिविधि से हरियाणा सरकार को भारी राजस्व हानि हो रही है, यमुना नदी के प्राकृतिक खनिजों का नुकसान बढ़ रहा है और नदी क्षेत्र की सुरक्षा तथा पर्यावरण दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के स्पष्ट आदेश हैं कि वन्यजीव और जलीय जीवों की सुरक्षा के लिए सूर्यास्त के बाद किसी भी प्रकार का खनन नहीं किया जा सकता चाहे वह वैध खनन पट्टा हो या अवैध। यमुना नदी क्षेत्र में रात के समय हो रहा यह खनन सीधे तौर पर एनजीटी के आदेशों और न्यायालयीय निर्देशों की अवहेलना है।

उन्होंने मांग करते हुए कहा कि  यमुना नदी क्षेत्र में रात के समय चल रही इन अवैध गतिविधियों का संज्ञान लेते हुए तुरंत संबंधित विभागों को मौके पर भेजकर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, खनन में लगी मशीनरी और वाहनों को जब्त किया जाए, और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की गतिविधियां न हो सकें।

आखिर कब जवाबदेही होगी तय

एक आम आदमी तो किसी भी गलत कार्य की सूचना ही संबधित विभाग को दे सकता है। इस सबके बावजूद संबधित एजेंसिया मूक दर्शक बन कर जिस प्रकार निहार रही है उससे तो यह आशंका सही साबित हो रही है यह काम बिना किसी मिलीभगत के संभव नहीं है। इस एरिया में जिन भी गार्ड, इंस्पेक्टर या फिर एनफाेर्समेंट के कर्मचारी की डयूटी होगी, अपने सीनियर को सूचना देकर  कार्रवाई करवाना उनका काम है। यदि ऐसा नहीं किया जा रहा है तो इसका मतलब है कि वे कर्मचारी अपना काम करने में सक्षम नहीं है।

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